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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

रह-रह कर नगर निगम को पॉलीथीन जब्‍ती पर ख्‍याल तो आता रहता है। पॉलीथीन को जब्‍त किया जाए, दुकानदारों और उपभोक्‍ताओं पर रोक लग सके इसके लिए अभियान तो चलाता है, पर पॉलीथीन के उत्पादन के खिलाफ निगम का अभियान पूरी तरह से ठप हो जाता है।

कारण है कि निगम के अधिकारी और उत्‍पादनकर्ता आपस में साठगांठ कर सरकार के आदेशों पर पलीता लगा देते हैं, जबकि कार्रवाई के नाम पर प्रदूषण सहित अन्‍य विभागों पर पल्‍ला झाड़ लेते हैं। इसीलिए निगम का अभियान भी दुकानदारों तक ही सीमित रहा जाता है।

 

 

शुक्रवार को एक बार फिर जोन एक में अभियान चलाकर लगभग 40 किलोग्राम पॉलीथीन व प्लास्टिक से बने गिलास व अन्य उत्पाद जब्त किए गए तो निगम की कार्यप्रणाली पर लोगों ने सवाल भी उठाए। सालभर पहले भी सख्ती के बाद पॉलीथीन के कैरीबैग का प्रचलन लगभग बंद हो गया था, लेकिन नगर निगम सुस्त हुआ तो फिर से प्रचलन शुरू हो गया।

 

 

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो एक बार पॉलीथीन पर प्रतिबंधित हुई। ताबड़तोड़ छापेमारी कर कई कुंतल पॉलीथीन जब्त तो की गई, लेकिन कुछ ही महीने बाद नगर-निगम सुस्त पड़ गया, जिससे दुकानों पर पॉलीथीन का प्रचलन फिर शुरू हो गया। चाय की दुकानों पर भी प्लास्टिक के गिलास भी दिखने लगे। 

 

 

“उत्‍पादकों पर रोक-टोक लगाने का अधिकार नगर निगम को नहीं है, हम सिर्फ गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगा सकते हैं। इसके साथ ही लखनऊ में निर्धारत मानक के विपरीत पॉलीथीन बनाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी सहयोग मांगा जाएगा।”

अपर नगर आयुक्‍त

नंदलाल सिंह

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