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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

शहर में प्रदूषण का यह आलम है कि सुबह से लेकर देर रात तक सांस लेना दुश्‍वार हो गया है। ना तो फेफड़े पूरी तरह से खुल रहे हैं और ना ही शरीर को ऑक्‍सीजन मिल पा रही है। यह हाल केवल सड़कों का ही नहीं बल्कि खुले मैदान से लेकर कार्यालयों और शहर के किनारे बसे गांवों तक के हैं।

बढ़े प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कवायद भी शुरू कर दी है। इसके लिए जल्‍द ही बैठक में रणनीति तय करते हुए कार्ययोजना बनाई जाएगी जिसमें एलडीए, मेट्रो अधिकारी, आवास-विकास, प्रदूषण बोर्ड, नगर-निगम जैसे विभाग शामिल होंगे।

 

 

 

डीजल वाहनों, अवैध निर्माणों, वाहनों के प्रदूषण, मेट्रो कार्य, सड़क पर निर्माण सामग्री के ढेर, आदि की सघन जांच होगी। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी और तय समय में काम पूरा करना होगा। ऐसा ना होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।

 

 

राजधानी की हवा 500 एक्यूआइ से ऊपर पहुंची तो लोगों सांस से लेकर त्‍वचा संबंधी कई बिमारियां होने लगीं। इतना ही नहीं किसी के आंख में जलन तो किसी को हाथ पैर में खुजली होनी शुरू हो गई। लगातार बढ़ रही दिक्‍कतों को देखते हुए डीएम ने अवैध निर्माण से लेकर कृषि अ‍पशिष्‍ट पदार्थों, डीजल चलित वाहनों और प्रदूषण को बढ़ाने वाले सभी बिंदुओं के आधार पर कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी।

 

 

पुराने शहर के चौक स्थित सरांय माली खां के छोटे से मोहल्‍ले से लेकर महानगर, अलीगंज, गोमतीनगर विस्‍तार, हरदोई रोड, कानुपर रोड पर जैसी जगहों पर मल्‍टीस्‍टोरी अवैध निर्माण रहे हैं। इन्‍हीं कारणों से धूल, मिट्टी के कण उड़कर वायुमंडल में पहुंच रहे हैं। मौसम साफ ना होने के कारण यह हमारे वायुमंडल से निकल नहीं पा रहे जिससे यह कण हमारे सांस लेने पर फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं और भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

 

इन अवैध निर्माणों को रोकने के लिए एलडीए के अवर अभियंता से लेकर अधिशाषी अभियंता तक काम कर रहे हैं, लेकिन खुलेआम वसूली और लूटखसोट के कारण एक भी अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग पाई। सड़कों पर सफाईकर्मी रोज कूड़ा जला रहे हैं तो वहीं सड़कों पर ही निर्माण सामग्री से लेकर डीजल चलित वाहन प्रदूषण फैला रहे हैं।

 

 

मेट्रो करे पानी का छिड़काव

हजरतगंज, केडी सिंह स्‍टेडियम, परिवर्तन चौक, हनुमान सेतु, आईटी से लेकर पॉलीटेक्निक तक मेट्रो का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। यहां पर भारी वाहनों से लेकर सामान्‍य ट्रैफिक का भी आना जाना होता है। इसी दौरान लगातार हो रहे मेट्रो निर्माण कार्य से ना केवल धूल-मिट्टी बल्कि निर्माण सामग्री और तोड़फोड़ के भी काफी कण हवा में आ जाते हैं। जो बढ़ते प्रदूषण का कराण बन रहे हैं।

 

 

जिलाधिकारी ने कहा कि इन सबसे निपटने के लिए मेट्रो अधिकारियों से निर्माण कार्य और तोड़फोड़ से लेकर उन सभी जगहों पर पानी का छिड़काव करने को कहा जाएगा जहां पर किसी भी तरह का प्रदूषण या धूल कण उड़ने की संभावना हो। यह काम उन्‍हें दिन और रात दोनों ही समय में करना होगा। 

 

 

“राजधानी में प्रदूषण बेहद गंभीर स्थिति पर पहुंच गया है। लगातार इसपर नजर भी रखी जा रही है। अवैधि‍ निर्माण, कृषि अपशिष्‍ट पदार्थ, कूड़ा आदि जलाने के कारण प्रदूषण कि स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जल्‍द ही एलडीए, आवास-विकास, मेट्रो अधिकारियों, परिवहन आदि विभागों के साथ बैठकर रणनीति तय की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को उनके कार्य के प्रति जवाबदेह भी बनाया जाएगा। समय से काम ना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।”

कौशल राज शर्मा

जिलाधिकारी

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