Actress Jhanvi kapoor  Shares The Image of Dhadak Sets on Social Media

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

लालबत्‍ती चौराहे जैसा वीआइपी चौराहा यहां तैनात टीएसआइ को नियम तोड़ने वाले चालकों के चालान करने के लिए मिला था जो पिछले डेढ़ महीने से खराब है। जिसकी जानकारी ना तो लाइन में है ना ही उच्‍चाधिकारियों को। दरअसल, यातायात नियंत्रण और वाहन चालकों पर अंकुश लगाने के मकसद से लाखों रुपये खर्च कर मंगाए गए बॉडी वार्न कैमरे लापता हो गए हैं। 28 कैमरे मंगाए गए थे जो कहां है इसकी जानकारी लाइन में भी नहीं है।

 

 

सवाल यह है कि आखिर ये कैमरे इस्‍तेमाल नहीं होने थे तो मंगाए क्‍यों गए थे। ग्राउंड जीरो की रिपोर्टिंग के दौरान  पता चला कि हजरतगंज जैसे चौराहों पर टीएसआइ कैमरा जरूर लगाते हैं, क्‍योंकि यहां से वीवीआइपी का काफिला निकलता ही रहता है इसलिए कैमरा लगाना उनकी मजबूरी भी है। जबकि पॉलीटेक्निक, मटियारी, बाराबिरवा, जैसे चौराहों के बॉडी वॉर्न कैमरे चार्जिंग में ही लगे रहते हैं।

 

शहर के व्‍यस्‍ततम चौराहों पर पुलिस की वसूली और अभद्र व्‍यवहार से निपटने के लिए टीएसआइ और एसआइटी को सौंपे गए थे, लेकिन पॉलीटेक्निक, लालबत्‍ती, जैसे चौराहे पर भी टीएसआइ कैमरा लगाना उचित नहीं समझते हैं। जब भी पूछा गया तो वह चार्जिंग में लगे होने या कैमरा खराब होने की बात कहकर पल्‍ला झाड़ने लगते हैं। हालां‍कि कुछ टीएसआइ तो इन कैमरों को केवल चालान करने के दौरान ही लगाने की बात करते हैं जबकि ड्यूटी के दौरान इसे लगाने को कहा गया था। इतना ही नहीं इन कैमरों को लेकर अपडेट जानकारी कैंट स्थित ट्रैफिक पुलिस लाइन में भी नहीं हैं, क्‍योंकि स्‍टोर का कार्यभार देख रहे दूधनाथ बॉडी वार्न कैमरों को लेकर कुछ बता ही नहीं पाए।

 

 

उन्‍हें पता ही नहीं कि यह कैमरे किसके पास है और कितने कैमरे सही हैं या खराब हो चुके हैं। तो वहीं आलाधिकारी सभी कैमरों के प्रयोग में होने का दावा कर रहे हैं। 25 हजार रुपये की लागत वाले इन कैमरों से एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। इन्‍हें सॉफ्टवेयर के जरिए इस तरह तैयार किया गया है कि रिकॉर्ड हुए डाटा को कोई भी टीएसआइ डिलीट नहीं कर सकता है। इन कैमरों को आधुनिक रिकॉर्ड कक्ष में लाकर डाटा सुरक्षित किया जाता है और डाटा को फॉर्मेट करने के बाद फिर से उपयोग में लाया जाता है।

 

 

करतूत छिपाने के लिए-

बॉडी वॉर्न कैमरों की विशेषता है कि इनका डाटा डिलीट नहीं किया जा सकता है। इसलिए चालान के दौरान यातायात कर्मी इन्‍हें पहनते ही नहीं क्‍योंकि इससे उनकी वसूली भी रिकॉर्ड होने का डर रहता है। यदि यह रिकॉर्ड  हो गया तो वह उसे डिलीट भी नहीं कर पाएंगे। यही कारण है कि टीएसआइ अपनी करतूत छिपाने के लिए बॉडी वॉर्न कैमरा लगाते ही नहीं।

 

 

बॉडी वार्न कैमरे की विशेषता- 

  • जुलाई 2016 में तत्‍कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने अमेरिका में बने बॉडी वॉर्न कैमरों को टीएसआइ-एसआइटी को बांटे थे।
  • वसूली और अभद्रता की शिकायत पर अंकुश लगाने के लिए।
  • यह कैमरे अंधेरे और घने कोहरे में 12 मीटर तक साफ वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है।
  • 16 घंटे की रिकॉर्डिंग होगी जिसे यातायात कर्मी डिलीट नहीं कर सकेंगे।
  • यह 32 मेगा पिक्सल और 32 जीबी की मेमोरी से लैस कैमरे से 10 घंटे की लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है।

 

 

“बॉडी वार्न कैमरे टीएसआइ और एसआइटी को बांटे गए थे। ये पुलिसकर्मी इन्‍हें लगा भी रहे हैं। समय-समय पर इसके रखरखाव से लेकर अन्‍य तरह के प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं। ड्यूटी के दौरान जो भी बॉडी वार्न कैमरे नहीं लगाएगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।”

रविशंकर निम

एएसपी ट्रैफिक

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