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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

गुरुवार को राजधानी में सपा पार्टी कार्यालय में एक प्रेस वार्ता हुई। इसमें पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने हिंदी दिवस के मौके पर किताब का किया विमोचन किया।  

यहां उन्होंने कहा- यूपी के चुनाव में सब कहते थे कि विकास सैफई में चला गया। अब विकास कहां से शुरू हो रहा है लोग देख रहे हैं। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मैं ये कह सकता हूं कि साबरमती के किनारे से ज्यादा खूबसूरत होता गोमती का किनारा।

बता दें, पीएम मोदी ने जापान के पीएम शिंजो आबे और नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को साबरमती स्टेडियम ग्राउंड में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की नींव रखी। इससे पहले पीएम मोदी, शिंजो आबे साबरमती रिवर फ्रंट भी गए थे।

 

               

      

 

अखिलेश ने जिन किताबों का विमोचन किया उनके नाम “दिन के दोहे” और “यह कैसी आजादी” हैं।

 

अखिलेश ने आगे कहा- ''बुलेट ट्रेन चलेगी तो बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? देश की सबसे ज्यादा आबादी दिल्ली से कोलकाता के बीच रहती है, यहां बुलेट ट्रेन चल जाए तब तो बात हो। मैं कह सकता हूं गोमती का किनारा ज्यादा खूबसूरत होता साबरमती के किनारे से।''

उन्‍होंने कहा, मैंने सदन में कहा था कि ये यूपी का बजट रोकने वाला बजट आया है। ये मेट्रो समाजवादियों की देन है। इस शहर के लोग जानते हैं कि ये मेट्रो समाजवादियों ने दी है। कोई नया काम इनको करने में छह साल लग जाएगा। हमारे प्रोजेक्ट ही दोबारा लॉन्च करके इन्होंने अपनी कार्यशैली बता दी है।

 

 

अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के वंशवाद वाले बयान पर कहा- ''राहुल जी हमारे साथ हैं, हमारे दोस्त हैं। उन्होंने देश की राजनीति के हिसाब से बताया। दुनिया में तमाम जगह है जहां एक परिवार से कई लोग राजनीति में आए हैं। अगर उनसे किसी और देश की राजनीति के बारे में पूछा जाता तो भी वो बताते।

बता दें, बता दें कि राहुल ने मंगलवार को बर्कले में कहा था कि- ''भारत में वंशवाद की राजनीति ही सभी पार्टियों की समस्या है और सिनेमा और कारोबार जगत में भी ऐसा ही चल रहा है।''

 

कर्ज माफी से किसान निराश

अखि‍लेश ने कर्ज माफी पर कहा- '' किसान को इंतजार है कि उनका कर्ज कब माफ होगा। पीएम ने चुनाव प्रचार में ये बात रखी थी कि पूरा कर्जा माफ होगा। जो मुख्यमंत्री हैं उन्होंने इसके लिए तमाम दरवाजे खटखटाए थे, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली तो अपने संसाधनों से कर रहे हैं। ये जिस तरीके से कर्ज माफी की जा रही है इससे किसान निराश हैं।

 

उन्‍होंने आगे कहा, यूपी में इस वक़्त डिजिटल मुख्यमंत्री सिर्फ डिजिटल बाते कर रहे हैं। वो जमीन पर नहीं दिखाई पड़ेगी। हमारे ही कामों पर मुहर लगा रहे हैं, लेकिन जनता को पता है, और वो जानती है कि किसने मेट्रो, एक्सप्रेस वे बनावाई।

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