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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

लाखों रुपये के बिजली बकाये को लेकर अभियान, लेसा पिछले कई साल से अनवरत चला रहा है। हर साल करोड़ों रुपये बकाया वसूलने वाले ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं लेकिन बकाया का बोझ लगातार बढ़ रहा है जबकि एजेंसियों की कार्यप्रणाली से बिजली विभाग संतुष्ट ही नजर आता है। अभियंताओं की मिली भगत और एजेंसियों की सांठगांठ के कारण बड़े बकायेदारों के कनेक्शन दिखावे को कटते हैं लेकिन फिर जुड़ भी जाते हैं मगर बकाया ज्यादा हो जाता है। बकाया वसूलने का खेल इतना इतना सुनियोजित है कि आनलाइन मानीटरिंग करने वाले अधिकारी भी केवल लकीर पीट रहे हैं।

बकायेदारी बढ़ने तथा सालों तक बिल वसूली न करने के बावजूद किसी अभियंता पर कोई कार्रवाई होती है न एजेंसी पर।  इस बावत मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एपी सिंह के मुताबिक बकाया वसूली के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अभियंता ही है लेकिन उन पर कार्रवाई पर कुछ नहीं कहते। वह केवल जिन उपभोक्ताओं से पैसा वसूला जा सकता है, उन्हीं पर फोकस करने की बात कहते हैं। लगातार राजस्‍व अभियान चलाये जाने के बाद आखिर उपभोक्‍ताओं का बिल लाखों में कैसे पहुंच जाता है इसका जवाब विभाग के बड़े अधिकारियों के पास भी नही है।

 

बकाया वसूली में भी खेल

दरअसल बकायेदार उपभोक्ताओं से वसूली भी एक खेल बन गई है। बकाया बढ़ रहा है और संदिग्ध उपभोक्ताओं की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है लेकिन मध्यांचल प्रशासन केवल तमाशबीन बना हुआ है। तमाम अभियान और आन लाइन मानीटरिंग के बावजूद बकाया बढ़ने पर मध्यांचल प्रबंधन ने जांच कराने का दम महीना भर पहले भरा था लेकिन जांच अभी तक शुरु नहीं हो पाई है। इस मामले पर मध्यांचल एमडी भी कुछ कहने को तैयार नहीं है।

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