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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश। डॉक्टर्स के मुताबिक, डिमेंशिया खुद कोई बीमारी नहीं बल्कि मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली बीमारियों का एक लक्षण है। इसमें याददाश्त, किसी की बात समझना, किसी समस्या का हल सोचना, बोलना आदि जैसी क्षमताएं क्षीण होती जाती हैं और आदमी का दिमाग काम करना बंद कर देता।

दुनिया भर में हैं डिमेंशिया के पेशेंट्स

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब 5 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। हर साल डिमेंशिया के करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। विश्व की जनसंख्या जैसे-जैसे बढ़ेगी वैसे-वैसे डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों की संख्या में भी इजाफा होगा।

बुढ़ापे में ही पकड़ता है डिमेंशिया

2010 में आई इंडिया डिमेंशिया की रिपोर्ट के मुताबिक जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है। 65 के बाद हर 5 साल इसका खतरा दोगुना हो जाता है। अक्सर डिमेंशिया के लक्षणों को बीमारी नहीं बल्कि बुढ़ापे का असर समझ लिया जाता है और मरीज का इलाज ही नहीं कराया जाता। हालांकि 30, 40 की उम्र में भी डिमेंशिया हो सकता है, जिसे जल्दी शुरू होने वाला डिमेंशिया कहते हैं।

सटीक इलाज नहीं है डिमेंशिया का

डिजेनरेटिव डिमेंशिया ठीक नहीं होता, लेकिन अब कई दवाइयां मौजूद हैं, जिससे स्थिति सामान्य बनाई जा सकती है और लंबे अरसे तक सामान्य स्थिति रह सकती है। जांच से पहले ये पता करना जरूरी होता है कि डिमेंशिया हुआ क्यों है। अगर कारण स्पष्ट हो जाए तो कई मामलों में इलाज संभव है।

ऐसे बचें डिमेंशिया से...

डिमेंशिया पर बहुत हद तक काबू पाया जा सकता है। ये बात कई शोध और अध्ययन में कही गई है। डॉक्टर्स का मानना है कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आपको कई बीमारियों से बचा सकता है। विशेषज्ञों के पैनल ने माना है कि डिमेंशिया के एक तिहाई मामलों की रोकथाम स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर की जा सकती है।

मानसिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी

डिमेंशिया से बचने के लिए जरूरी है कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहें। अपने ब्रेन को यूज करें। पहेली, शब्दों और संख्याओं का खेल, नई चीजें सीखकर मानसिक रूप से सक्रिय रहें। व्यायाम और योग से वजन पर नियंत्रण रखें। इससे बीपी ठीक रहेगा, डायबिटीज, हार्ट की बीमारियों से भी रक्षा होगी। तनाव नहीं होगा।

समाज से जुड़े रहने की कोशिश करें

ऐसा देखा गया है कि डिमेंशिया से पीड़ित लोग समाज से कट जाते हैं। अकेलेपन और उदासी में रहने लगते हैं। इसलिए डिमेंशिया से बचने के लिए जरूरी है कि आप समाज में लोगों से जुड़े रहें। परिवार, दोस्तों से बातचीत करें।

स्वस्थ जीवनशैली और खानपान पर ध्यान दें

अपने खानपान में सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम किजिए। विशेष रूप से हरी पत्तेदार सब्जियां अपने आहार में शामिल कीजिए। जिससे विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड की कमी न हो। इतना खाइए कि वजन जरूरत से ज्यादा न बढ़ जाए। शराब और धूम्रपान से बचिए।

अच्छी नींद सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण

समय पर सोना और उठना और दिमाग को आराम देने के लिए नींद बहुत जरूरी है।

लापरवाही से परहेज़

कई बीमारियां ब्रेन को प्रभावित करती हैं। इसलिए हाई बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल का ध्यान रखकर इसका खतरा कम किया जा सकता है। कई शोधों से साबित हुआ है कि डायबिटीज, हाइपर टेंशन, लिपिड्स की वजह से स्ट्रोक्स का खतरा होता है, जिससे दिमाग के हिस्सों को क्षति पहुंचती है। इसकी वजह से वेस्कुलर डिमेंशिया का जोखिम बढ़ जाता है।

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