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बहादुर महिला कमांडोज़ ने 15 दिन में कर दिया ये मुश्किल काम पूरा

Ladies Special | Last Updated : Sep 17, 2017 02:43 PM IST


Women Commandos Made This Difficult Task Easy


दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

देश की आधी आबादी कही जाने वाली महिलाएं कहीं से भी पुरुषों से कम नहीं हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा तोड़े गए एक पुल को मात्र 15 दिन में ही बनाकर तैयार कर दिया। यही नहीं, इस दौरान सुरक्षा की सभी जिम्मेदारियां भी महिलाओं ने खुद ही संभाली थी। जानिए क्या था पूरा मामला-

लोगों को परेशानी से मुक्ति मिली

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में 11 साल पहले नक्सली घटना में टूटे पुल को महिला कमांडोज की सुरक्षा में एक बार फिर बना दिया गया है। इस पुल के बनने से क्षेत्र के हजारों लोगों को परेशानी से मुक्ति मिली है। इस पुल को बनाने में महिला कमांडो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नक्सलियों ने तोड़ दिया था पुल

टिण्डोडी गांव में बने पुल को नक्सलियों ने 11 साल पहले साल 2006 में विस्फोट से उड़ा दिया था। सुरक्षा बलों ने क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण पुल को फिर से बनाने का बीड़ा उठाया और यह पुल फिर से बनकर तैयार है। इसके बाद से इस क्षेत्र के दलेर, बिरियाभूमि, आड़वाड़ा और टिण्डोडी गांव के लगभग तीन हजार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। सुरक्षाबलों ने लोगों की पेरशानी दूर करने के लिए पुल को दोबारा बनाना शुरू किया।

नक्सल विरोधी अभियान में पारंगत हैं ये महिला कमांडोज

असल में निर्माण कार्य की सुरक्षा के लिए डीआईजी के साथ 30 महिला कमांडोज के दस्ते को चुना गया जो नक्सल विरोधी अभियान में पारंगत हैं और इन कमांडोज को गांव में बन रहे पुल की सुरक्षा में तैनात कर दिया गया। 31 अगस्त को पुल निर्माण का कार्य पूरा हो गया।

इन महिला कमांडोज में से कुछ पहले नक्सली ही थीं

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर महिला कमांडोज आत्मसमर्पित नक्सली हैं, जो यहां के दुर्गम इलाके और घने जंगलों से अच्छी तरह से परिचित हैं। इन महिला कमांडो को नक्सलियों के खिलाफ व्यापक प्रशिक्षण दिया गया है और वे आधुनिक हथियारों से लैस हैं।

भारी बारिश में किया काम

भारी बारिश होने के बावजूद महिला कमांडोज ने टिण्डोडी गांव के बाहरी इलाके में अस्थायी शिविरों की स्थापना की और पिछले दो हफ्तों से इस परियोजना को सुरक्षा दी जिसकी वजह से यह पुल सफलतापूर्वक बन सका।

खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भी करती हैं मदद

अधिकारियों के मुताबिक राज्य में पुलिस ने महसूस किया है कि माओवादियों के साथ हो रही लड़ाई में महिला कमांडोज के शामिल होने से खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में मदद मिल रही है क्योंकि यह कमांडोज गांव में महिलाओं से मिलने और उनसे बेहतर संबंध बनाने में सक्षम हैं।

 



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