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दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

हर महिला का सपना होता है बच्‍चे को जन्‍म देना...मां बनना। कई बार ईश्‍वर की कुछ और ही मर्जी होती है। नन्‍हीं किलकारियां गूंजने से पहले कई बार महिलाओं का गर्भपात हो जाता है। इस स्थिति में जितनी क्षति शरीर को होती है उससे कई ज्‍यादा मानसिक दर्द होता है।

गर्भपात बेहद कठिन दौर होता है। इस दौरान महिला का शरीर कई बदलावों से गुजरता है। ऐसे में उन्‍हें अधिक केयर की जरूरत होती है। इस दर्द से उबरने में उन्‍हें काफी समय लग जाता है। ऐसे में उन्‍हें भावनात्‍मक सहारे की उम्‍मीद होती है।

आज यहां हम कुछ ऐसे टिप्‍स दे रहें है जिसे फॉलो करते हुए महिलाएं गर्भपात के दर्द से जल्‍द ही बाहर निकल सकती है।


स्‍वीकार करें

सबसे पहले तो आप यह स्‍वीकार करें कि आपका गर्भपात हुआ है। जितना हो सकें सकारात्‍मक रहें, तनावमुक्‍त होकर आप जल्‍द इस स्थिति को खुद को उबार सकेंगी।

करीबियों के साथ समय बिताएं

गर्भपात के बाद परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताएं क्योंकि इस दौरान मानसिक सहारे की आवश्यकता बहुत अधिक होती है।



चिकित्‍सकों से मिलें

यदि आप ऐसा महसूस करती हैं कि बच्चे को खोने के बाद बहुत अधिक तनाव महसूस कर रही हैं तो पेशेवर चिकित्सकों की सहायता लें।

स्‍वस्‍थ भोजन

एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भपात के बाद आप स्वस्थ आहार लें जिसमें आयरन युक्त आहार जैसे पालक, सब्जियां, बिना चर्बी वाला मांस आदि शामिल हैं क्योंकि गर्भपात में शरीर से बहुत अधिक मात्रा में खून निकल जाता है।

संबंध बनाने से बचें

गर्भपात के बाद लगभग तीन सप्ताह तक आप यौन संबंध न बनाएं क्योंकि इस समय महिलाओं के योनि में बहुत अधिक दर्द होता है और संक्रमण की संभावना भी अधिक होती है।

नियमित जांच जरूरी

आपको यह सलाह दी जाती है कि आप अपने गाइनेकोलॉजिस्ट के पास नियमित तौर पर जाएं ताकि संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता चल सके।

दोबारा गर्भधारण करने से पहले मिले डॉक्‍टर से

यदि आप गर्भपात के बाद पुन: बच्चे के लिए प्रयत्न करना चाहती हैं तो पहले अपने डॉक्टर से बात करें ताकि आपको पता चल सके कि आप पुन: गर्भवती होने हेतु स्वस्थ हैं अथवा नहीं।

वर्कआउट बहुत जरूरी है

आप कम से कम दो सप्ताह तक कसरत न करें और अल्कोहल का सेवन न करें क्योंकि आपके शरीर में सुधार होता रहता है।

संक्रमण होने से खुद को बचाएं

गर्भपात के बाद अपने गर्भाशय की ग्रीवा आंशिक रूप से खुली रह सकती है, जिसकी वजह से मूत्र मार्ग में संक्रमण हो सकता है। इससे बचने के लिये रूई का फाहों का इस्तेमाल करने, सार्वजनिक पूल (तालाब आदि), बाथ टब का इस्तेमाल और संभोग (सेक्सुअल इंटरकोर्स) से बचना चाहिये। गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर समय-समय पर जांच जरूर कराते रहिए।
 

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