Sapna Chaudhary Joins Congress

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

एक स्टडी रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पतालों में वीकऐंड, छुट्टियों के दौरान और रात को महिलाओं की होने वाली डिलीवरी में ज्यादा जोखिम होने की आशंका होती है। टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट हेल्थ सर्विसेज से मिले डेटा की मदद से अमेरिका के कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी ने 2005 से 2010 तक दो मिलियन से अधिक मामलों पर रिसर्च की है। एक इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित ऐनेलिसिस में बताया गया की कि महिलाओं में टूटे हुए गर्भाशय, अनियोजित गर्भाशय संबंधी मुश्किलों को देखा गया है।

रिसर्च टीम ने केवल सिंगल बर्थ (यानी जुड़वां नहीं) वाली महिलाओं पर फोकस किया, जो 20 सप्ताह से अधिक गर्भवती थी। इसमें एक चिकित्सक और फिजीशियन ने भी भाग लिया। स्टडी में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या डिलीवरी की परेशानियां काम की शिफ्ट में बदलती हैं? जैसे-जैसे काम की शिफ्ट में घंटे बीतते जाते हैं, वीकेंड और छुट्टियों के दिन बढ़ते जाते हैं। नतीजे बताते हैं कि रात की शिफ्ट के दौरान गर्भवती महिलाएं डिलीवरी में 21.3 प्रतिशत ज्यादा खतरा अनुभव करती हैं। हर शिफ्ट में काम के हर घंटे के बढ़ने के साथ डिलीवरी कॉम्पिलकेशन में 1.8 प्रतिशत वृद्धि होती है।

 

उन्होंने यह भी पाया कि सप्ताह की शुरुआत में जो महिलाएं शिशुओं को जन्म देती हैं, उनकी तुलना में सप्ताह के अंत में शिशु को जन्म देने वाली महिलाएं 8.6 प्रतिशत ज्यादा परेशानियों  का सामना करती है। रिसर्च में पता चला है कि छुट्टियों पर होने वाली डिलीवरी में कॉम्पिलकेशन 29.0 फीसदी ज्यादा होता है। स्टडी में यह भी पता किया गया कि क्या शिक्षण अस्पतालों में डिलीवरी संबंधी मुश्किले अधिक हैं या नहीं, और क्या यह तब बढ़ जाता है जब जुलाई में स्टूडैंटस का एक नया समूह अस्पतालों में प्रवेश करता है, जिससे चिकित्सीय अनुभव में अचानक गिरावट आती है। गैर-शिक्षण अस्पतालों में डिलीवरी करवाने वाली महिलाओं की तुलना में शिक्षण अस्पतालों में शिशुओं की डिलीवरी कराने वाली महिलाओं में डिलीवरी से जुड़ीं मुश्किलें बढ़ने की संभावना 2.2 गुना अधिक होती है।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement