Akshay Kumar Gold And John Abraham Satyameva Jayate Box Office Collection Day 2

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

बहुत प्रचलित कहावत है, भय बिन होए न प्रीत। मगर परिवहन विभाग को यह समझ में नहीं आता है। यही कारण है कि सड़क सुरक्षा के नाम पर तमाम फजीहत होने के बावजूद विभाग सड़क सुरक्षा के नाम आयोजन तो कई कर रहा है लेकिन प्रवर्तन के नाम पर केवल बेगारी टाली जा रही है। यही कारण है कि हादसों पर अंकुश लग रहा है न ही वाहन सवार ही नियमों का पालन कर रहे हैं। अधिकारी इसके लिए संसाधनों की कमी की ही दुहाई दे रहे हैं मगर इसका कोई असर सड़क पर नहीं दिख रहा है।

 

परिवहन विभाग 23 अप्रैल से तीस अप्रैल तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने जा रहा है। इस एक सप्ताह में रोड सेफ्टी पर सेमिनार, स्कूल बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी, वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण, हेलमेट सीट बेल्ट की जांच, वाकाथान व साइकिल रैली, महिला स्कूटी रैली व सड़क हादसों में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि आदि आयोजन होंगे। यह कार्यक्रम हर साल होते हैं लेकिन अहम सवाल यह है कि जिन बातों के लिए जागरुक किया जाता है, उनके लिए प्रवर्तन कितना होता है। अधिकारी हादसों के लिए रोड इंजीनियरिंग से लेकर वाहन चालक की लापरवाही तक कई कारण तो बताते हैं लेकिन सवाल यह हकीकत में उन पर अमल कितना होता है। अधिकारी स्वयं मानते हैं कि हादसे पर रोक लिए चार ई (फोर ई) बहुत महत्वरपूर्ण है। पहला ई मतलब एजुकेशन। दूसरी ई मतलब इंफोर्समेंट,  तीसरा यानी रोड इंजीनियरिंग और चौथा  ई मतलब इमरजेंसी ट्रामा। इनमें भी सबसे अधिक प्रभावशाली इंफोर्समेंट यानी प्रवर्तन को माना गया है। मगर कम से कम प्रदेश में ऐसा कहीं नहीं है।

अब जरा गौर फरमाएं। प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट तथा नेशनल रोड सेफ्टी काउंसिल की फटकार के बाद प्रत्येक बुधवार को हेलमेट –सीट बेल्ट की जांच का अभियान शुरू हुआ लेकिन सारा अभियान सप्ताह में एक दिन तक सीमित हो गया। यानी बुधवार के अलावा परिवहन अधिकारी जांच करते नहीं दिखते। यही नहीं, सरकार ने स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले वाहनों की चेकिंग के आदेश दिए तो तत्काल वे वाहन चिन्हित कर लिए गए जो स्कूलों के नाम पर पंजीकृत थे लेकिन ऐसे हजारों वाहन तो निजी आपरेटरों के हैं और कथित रूप से स्कूल परमिट प्राप्त हैं, उनकी लिस्ट ही तैयार नहीं हो सकी है। अब इस जांच से कोई फायदा हुआ है, यह केवल कागजी बातें हैं।

 

सड़क पर खुलेआम सुप्रीम कोर्ट की गाइड का धज्जियां उड़ रहीं है लेकिन परिवहन विभाग स्कूली परमिट देने के बावजूद निजी वाहनों को स्कूल वाहन मानने को तैयार नहीं है। विभाग की इस सोच का फायदा स्कूल भी उठा रहे हैं और वह ऐसे वाहनों को अभिभावकों द्वारा कांट्रैक्ट किए जाने की दलील देते हैं मगर सवाल यह है कि फिर इन वाहनों को टैक्स राहत क्यों दी जा रही है। ये सारे  सवाल अनुत्तरित हैं। मगर विभाग सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने की तैयारियां कर रहा है। हादसों पर अंकुश लागने के लिए ऐसे संगठन को निमंत्रित किया जा रहा है जिन्होंने उत्तर प्रदेश में काम ही नहीं किया है और जहां काम किया है, वहां ट्रैफिक रेगुलेशन का काम पुलिस देखती है। अब इससे कितना ट्रैफिक सुरक्षित होगा यह तो भविष्य की बात है लेकिन सड़क सुरक्षा सप्ताह भव्य बनाने की तैयारियां जरूर की जा रही है।

रोड सेफ्टी सप्ताह का मकसद लोगों को जागरुक करना है। इसके लिए सतत प्रयास हो रहे हैं। विभाग भी कर रहा है और लोगों से भी अपील की जा रही है कि हेलमेट –सीट बेल्ट उनकी अपनी सुरक्षा के लिए है। इसके बावजूद लोग नहीं मानते तो जांच अभियान चला कर उनका चालान किया जाता है। इस सप्ताह के मकसद स्कूली बच्चों से लेकर वाहन चालकों तक को जागरुक करना है। वजह है कि घर का बच्चा अगर सुरक्षा के प्रति सचेत होगा तो अपने परिवार को भी टोकेगा और यह लक्ष्य हासिल हो जाएगा तो समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
 

अरविंद कुमार पांडेय

अपर परिवहन आयुक्त

 

 

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Public Poll