Home Lucknow News Transformer Burning Case In Lucknow City

बीजेपी ने चुनाव लड़ने के लिए करोड़ों रुपये दिए- कांग्रेस

हिमाचल के किन्नौर में भूकंप के झटके, तीव्रता 4.1

कुमारस्वामी से मुलाकात के बाद तय होगी आगे की रणनीतिः गुलाम नबी आजाद

गहलोत और वेणुगोपाल ने राहुल को कर्नाटक के ताजा हालात की जानकारी दी

कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने 6000 करोड़ रुपये खर्च किए- आनंद शर्मा

गारंटी में फुंक गए राजधानी में 1200 ट्रांसफार्मर

Lucknow | Last Updated : Nov 20, 2017 01:52 PM IST
  • ढाई हजार से ज्‍यादा जल जाते हैं हर वर्ष ट्रांसफॉर्मर
  • मरम्मत में अनिमियतता और ओवरलोडिंग की वजह से जलते हैं ट्रांसफॉर्मर

Transformer Burning Case in Lucknow City


दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।  

 

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपने चुनाव प्रचार में हर स्थान पर बेहतर बिजली आपूर्ति की दलीलें दे रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सरकार की प्राथमिकता के नाम पर अभियंता अपनी जेब भर रहे हैं।

ट्रांसफार्मरों की मरम्मत के नाम पर ही हर महीने लाखों का खेल हो रहा है। व्यवस्था का आलम यह है कि हर महीने करीब चार सौ ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं और अभियंता उम्दा बिजली आपूर्ति की दलीलें देते नहीं थक रहे हैं।

 

 

खास बात यह है कि लेसा में विभिन्न योजनाओं में ट्रांसफार्मर तो लगाए जा रहे हैं लेकिन इसका रिकार्ड लेसा के स्टोर के अभियंता नहीं दे पातें। इसी तरह से ट्रांसफार्मरों की मेंटीनेंस के नाम पर हर क्षेत्र में अभियंता जेब भर रहे हैं। यही कारण जिन ट्रांसफार्मरों की मेंटीनेंस की गई, वह अभी कुछ समय में जल गए।

 

 

लेसा में लगाए ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले आठ महीनों में करीब 3250 ट्रांसफार्मर जल गए। इनमें 1200 ट्रांसफार्मर ऐसे थे जो अपने गारंटी काल में थे। लेसा में कुल ट्रांसफार्मर 15000 हजार के करीब हैं और ऐसे में बीस फीसद से ज्यादा ट्रांसफार्मर हर महीने खराब हो रहे हैं।

खराब हुए ट्रांसफार्मरों की वर्कशाप में मरम्मत की जाती है लेकिन इसका रिकार्ड गायब कि मरम्मत किया गया ट्रांसफार्मर कितने दिन चला। अभियंता भी इस बारे में कुछ ज्यादा नहीं बता पाते जबकि ट्रांसफार्मर की मरम्मत औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च करता है।

 

 

गुणवत्ता को लेकर प्रश्न चिन्ह

बिजली विभाग में घटिया ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति को लेकर हमेशा ही आरोप लगते रहे हैं। कुछ समय पूर्व पावर कॉर्पोरेशन अध्यक्ष ने भी घटिया ट्रांसफार्मरों की शिकायत के मद्देनजर जांच कराने के आदेश किए थे, लेकिन यह जांच जरा भी आगे नहीं बढ़ीं। जबकि ट्रांसफार्मरों की मरम्मत तथा जलने का सिलसिला लगातार जारी है।

 

 

जल जाते बीस फीसद नए ट्रांसफॉर्मर

लेसा में व्याप्त भ्रष्टाचार का नतीजा है कि हर साल औसतन बीस फीसद ट्रांसफार्मर अपने गारंटीकाल में भी फुंक रहे हैं। वर्ष 1100 ट्रांसफॉर्मर अंडर गारंटी फुंकें थे तो 2017 के आठ महीनों में 1200 से ज्यादा ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं।

ऐसा तब है कि राजधानी में बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर फीडरों का विभक्तीकरण कराया गया। क्षमता बढ़ाने के लिए नए ट्रांसफार्मर प्रतिस्थापित किए गए लेकिन इसके बावजूद नए ट्रांसफार्मरों के जलने की दर से व्याप्त भ्रष्टाचार की तस्वीर साफ हो जाती है।

 

"ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत तथा रिकॉर्ड वर्कशाप में ही रखा जाता है। इस बात की जानकारी ही नहीं है कि बीस फीसद ट्रांसफॉर्मर गारंटी में जल रहे हैं। इसके लिए जांच कराई जाएगी।"

आशुतोष कुमार

मुख्य अभियंता (ट्रांसगोमती)



" जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555 "


Loading...


Flicker News

Loading...

Most read news


Most read news


rising@8AM


Loading...