Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।  

 

इस समय मां दुर्गा की पूजा-अराधना वाली नवरात्रि का पर्व चल रहा है। प्रदेश के कानपुर में भी एक ऐसे मंदिर की पूजा की जाती है जो सैकड़ों वर्ष पुराना है। यहां चौक सर्राफा बाजार स्थित बंगाली मोहाल में माता काली का सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर स्थापित है। मंदिर की मान्यता यह है कि जो आदमी सच्चे मन मनोकामनां मांगकर मंदिर में एक ताला बांधता है। माता उसकी माता सभी मनोकामना पूरी कर देती है। वही नवरात्रि में मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

 

 

 

स्थानीय निवासी ने बताया कि, ''इस मंदिर में हम अपने माता पिता के साथ बचपन में माता के दर्शन करने आते थे। आज भी हम इस मंदिर में दर्शन करने जरूर आते है। मेरी शादी शहर से बाहर हुई है, लेकिन नवरात्रि में खासकर मंदिर में दर्शन करने आते हैं। मंदिर में मान्यता है कि यहां ताला बांध कर माता से जो भी मुराद मांगो वह जरूर पूरी होती है।''

 

 

वहीं पुजारी ने कहा, ''मंदिर कब और किसने बनवाया साथ ही मां काली यहां कैसे विराजमान हुई ये आज तक कोई नहीं जान पाया। कहते हैं कि सदियों पहले एक महिला भक्त बहुत परेशान रहा करती थी, और वो नियम से इस मंदिर में सुबह पूजन के लिए आया करती थी।''

उन्‍होंने बताया कि- एक बार वो मंदिर के प्रांगण में जब ताला लगाने लगी तो उस समय के पुरोहित ने उससे इसके बारे पूछा तो उसका जबाब था कि मां ने सपने में हमसे कहा था कि तुम एक ताला मेरे नाम से मेरे मंदिर प्रांगण में लगा देना तुम्हारी हर इच्छा पूरी हो जाएगी जाएगी।

 

 

उन्‍होंने आगे कहा कि- उसके बाद से मां काली का नाम ताला वाली देवी भी पड़ गया। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद नवमी के दिन बकरे की बलि भी देते हैं। जिसे प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

हर अमावस्या को माता का दरबार पूरी रात खुलता है, साथ ही मंदिर में पूजा आरती पूरी रात होती है। माता के दर्शन के लिए कानपुर ही नहीं प्रदेश के कई जिलो से लोग यहां पर दर्शन करने आते हैं।

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