Kareena Kapoor Will Work With SRK and Akshay Kumar in 2019

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

छोटे बच्चों के लिए उनके आसपास की दुनिया नई चीज़ों से  भरी होती है, जिसमें हर रोज उनके नए अनुभव और उनसे जुड़े नए प्रश्न होते हैं। इन्हीं पहेलियों को वे आपकी मदद से सुलझाने की कोशिश करते हैं। कई बार इन्हें सुन कर आपकी हंसी नहीं रुकती। बच्चे के सवालों के साथ ही उसकी उम्र के अनुरूप कुछ ऐसे नाजुक विषय भी होते हैं जो उसकी सुरक्षा से जुड़े होते हैं, जिनके बारे में उसे समझाना और बताना भी बेहद जरूरी होता है। कैसे दें, इस मुश्किल काम को आसानी से अंजाम, आइए जानें...


 

सवालों के हल के साथ जरूरी सीख भी 
दो से चार साल की उम्र के बच्चे जिनके शब्दों का भंडार अभी बढ़ रहा होता है, वे नई चीजें देख और सीख रहे होते हैं। आपका लाडला इसी उम्र के बीच अपने पहले स्कूल में पहला कदम रखता है, जहां उसका सामना बाहर की दुनिया से होता है। उनकी इस नाजुक उम्र में उनके मन में उठते सवालों और शंकाओं का समाधान करना जरूरी होता है, तो साथ ही उनकी सुरक्षा का सवाल भी होता है। इसलिए उनके प्रश्नों के सही उत्तर देने के साथ ही उनकी उम्र से जुड़ी अहम बातों की जानकारी देना भी जरूरी है।
 

सिखाएं प्राइवेसी 

2-3 साल की उम्र के बच्चे लड़के और लड़की में फर्क नहीं कर पाते। उन्हें शरीर और प्राइवेसी से जुड़ी बातों की समझ नहीं होती, जिनकी वजह से वे परेशानी में पड़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप उनकी उम्र और समझ के अनुसार इनसे जुड़ी बातों की समझ विकसित करें और उन्हें लड़के और लड़की में शारीरिक फर्क की बुनियादी बातों को समझाएं। उसके प्राइवेट पार्ट्स के बारे में जानकारी दें। उसे बताएं कि उसके शरीर के कुछ अंगों को केवल आप या डॉक्टर ही छू सकते हैं, वह भी केवल तभी जब उसे इसकी जरूरत महसूस हो। या अगर कोई उसके शरीर के इन अंगों को छूने की कोशिश करे या वह किसी स्थिति में असहज महसूस करे तो उसे आपको तुरंत बताना चाहिए। अगर आपका बच्चा स्कूल बस या वैन से आता-जाता है तो उससे संबंधित सावधानियों के बारे में भी बताना जरूरी है। 
 

विश्वास कायम करें 
स्कूल जाने की उम्र में कुछ घंटों के लिए ही सही, बच्चा बाहर की दुनिया के बीच आपसे अलग रहता है। यह जितना आपके लिए चिंताजनक होता है, उतना ही बच्चे के लिए भी उलझन भरा अनुभव होता है। इस समय बेहद जरूरी है कि आप बच्चे और अपने बीच प्यार और पूरा विश्वास कायम करते हुए उसे सही और गलत चीजों के बारे में समझाएं। उसे प्रोत्साहित करें कि वह किसी भी असुविधाजनक स्थिति में खुलकर आपको सब कुछ बताए।
 

नजरंदाज न करें 
एक जिम्मेदार मां-बाप के तौर पर बच्चे के किसी भी प्रकार के सवालों को नजरंदाज करने या टालने की कोशिश हरगिज न करें। छोटा बच्चा अपने हर सवाल के लिए सबसे पहले आप पर ही भरोसा करता है, लेकिन अगर आप उसकी बातों को अनसुना कर देंगी या उसकी दुविधा को दूर नहीं करेंगी, तो इनके जवाब वह अपने हमउम्र बच्चों से तलाशने की कोशिश करेगा जो खुद भी इनके लिए तैयार नहीं हैं। या हो सकता है कि वह इसके लिए किसी अनजान पर भरोसा करे जो उसकी सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। उसके प्रश्नों के साथ ही उसके मन में चल रहे विचारों को जानना भी बेहद जरूरी है, ताकि आप उसे गलत नजरिए को अपनाने और गलत सोच के साथ बड़ा होने से बचा सकें।

 

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