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सियासी दांव पेंच का अखाड़ा बनता सुप्रीम कोर्ट

Editorial | Last Updated : Apr 20, 2018 06:25 PM IST

 

  • मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाअभियोग प्रस्ताव


Editorial on Impeachment motion against CJI Dipak Misra


संजय शुक्ल

 

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महा अभियोग लाने का प्रस्ताव आज उपराष्ट्रपति के पास पहुंच गया। अगर इस प्रस्ताव के आने के बाद न्यायपालिका की गरिमा को भी सियासत धूमिक करने में लग गई है। वैसे इसकी जमीन काफी पहले से तैयार हो रही थीं। पूर्व जस्टिस लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद भाजपा न्यायपालिका के फैसले को अपनी जीत करार देते हुए कांग्रेस पर हमलावर हो गई। कांग्रेस  के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग होने लगी। उधर कांग्रेस उससे भी एक कदम निकल गई और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए पत्र राष्ट्रपति को दे दिया।

 

ये सियासी उठापटक थी लेकिन सवाल यह है कि ऐसा क्या हो गया कि जिस सुप्रीम कोर्ट पर देश हर आम नागरिक विश्वास रखता है और उसका सम्मान करता है, उसके सामने यह असमंजस वाली स्थिति पैदा होती जा रही है। मगर पिछले दिनों के हालात पर नजर डाले तो स्थिति सामान्य तो कम से कम नहीं है। आपको याद होगा कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट के ही चार न्यायाधीशों ने रोस्टर को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। न्यायाधीश इतने उद्वेलित थे कि उन्होंने प्रेस कांफ्रेस तक कर डाली।

हमला मुख्य न्यायाधीश के बहाने सरकार पर था लिहाजा विपक्ष भी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गया। इस डैमेज को कंट्रोल करने में खासी मशक्कत हुई लेकिन मामला शांत हुआ तो भाजपा ने स्थिति को पूरी तरह से सामान्य बताते हुए इसे विपक्ष की ही साजिश करार देना शुरू कर दिया। इन्हीं आरोप –प्रत्यारोप के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महा अभियोग प्रस्ताव लाने की रणनीति बनी लेकिन बैकफुट पर पहुंचते ही विपक्ष दल इस प्रकरण पर शिगूफा छोड़ शांत हो गए। मामला ने तूल पकड़ा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस लोया की मृत्यु के मामले की जांच को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद।

 

उच्चतम न्यायालय याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट राजनैतिक मामलातों से दूर रखने की हिदायत तक दे डाली। दरअसल जस्टिस लोया सोहराबुद्दीन इंकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे और उस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपी है। इस काऱण से जस्टिम लोया की मौत आसामान्य मौत अपने आप में संदेह में आ गई थी। हालांकि उनकी मौत की वजह हार्ट अटैक को माना गया और उनकी मृत्यु के वक्त उनके साथ दो न्यायाधीश भी थे। इसे भाजपा ने स्वंय की जीत मानते हुए इस पूरे मामले पर कांग्रेस को निशाने पर ले लिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी मांगने तक की मांग कर डाली। भाजपा के तमाम नेता इस पूरे मामले को अपनी जीत और कांग्रेस के ष़ड़यंत्र के तौर पर प्रस्तुत करने में लगे हैं।

इसी सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस ने सहयोगी दलों के सहयोग से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महा अभियोग चलाने का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है। इस प्रस्ताव पर 71 सांसदों के हस्ताक्षर भी है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कही है। कांग्रेस के नेता एवं उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तो संविधान के संकट में होने तक की दलील दे दी है। अब यह महाभियोग चलता है अथवा नहीं लेकिन इससे उच्चतम न्यायालय की गरिमा को जरूर ठेस पहुंच रही है।

 

दरअसल इसके पहले अनुसूचित जाति – जनजाति अधिनियम (एससी एसटी एक्ट) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पूरे देश में हिंसा हुई। तमाम सियासी दलों ने उस पर भी राजनीति की और अब तक कर रहे हैं। अब जस्टिस लोया की मौत  पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई सिसायी दलों ने इसे काला दिन करार दे दिया। सवाल यह है कि कानून बनाने वाले ही कानून के सर्वोच्च मंदिर पर सवाल खड़े करेंगे फिर आम जनता से उम्मीद क्यों की जाएं। राजनैतिक विष्लेशकों के मुताबिक जो स्थितियां बन रही हैं, उनसे न्यायालय के इकबाल ठेस पहुंच रही है और यह राजनीति के निम्नतम स्तर पर पहुंचने का प्रमाण है।



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