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लखनऊ की 80 साल पुरानी रामलीला के बारे में जानिए

Lucknow | 20-Sep-2017 01:20:01 PM
Details of 80 Year Old Ramlila of Lucknow

दि राइजिंग न्यूज़

निमिषा श्रीवास्तव

लखनऊ

 

भारतीय उत्‍सव के क्‍या कहने। चहुंओर जश्‍न और हर्ष व्‍याप्‍त रहता है। सितंबर से ही हर कोई उल्‍लासमय हो जाता है। हो भी क्‍यों न, दशहरा-दीपावली का जो समय होता है ये। तो आज बात करते हैं लखनऊ का दशहरा और उससे जुड़ी धूमधाम की।

लखनऊ में दशहरे का मुख्‍य आकर्षण वर्षों से चली आ रही रामलीला है।

 

 

लखनऊ के चौक क्षेत्र में 1937 से चलती आ रही रामलीला आज भी लोगों में उतनी ही लोकप्रिय है। दशहरा के दिन से प्रारम्भ होने वाली रामलीला देखने के लिए लोगों को जमावड़ा लग जाता है। बच्चों से लेकर बड़े सभी इस रामलीला मंडली का भाग बनते हैं। यूं तो इस रामलीला में हर कलाकार 2-3 साल तक अपना किरदार करता है पर रावण का किरदार पिछले 40 साल से एक ही व्यक्ति कर रहा है। जानते हैं उनके बारे में..

 

विष्णु त्रिपाठी चौक की रामलीला में अपनी बुलंद आवाज़ के साथ 1978 से रावण का किरदार निभा रहे हैं। उनके इसी दमदार किरदार की वजह से वे शहर भर में “लंकेश” के नाम से जानें जाते हैं। वे इस किरदार में इतने लीन हैं कि क्षेत्र भर में जितने भी रामायण पर आधारित नाट्य होते हैं उसमें वे ही रावण के संवाद का लेख्गन करते हैं। उनको लखनऊ का पहला पुरस्कार लक्षमण मेला मैदान में 5 मई 2003 को विश्नोप्रांत शास्त्री जी ने दिया था।

 

 

 

प्रोफेशन नहीं श्रद्धा है ये

उन्होंने बताया कि उनकी रामलीला मंडली में कोई भी कलाकार प्रोफेशनल नहीं है जो अपने किरदार के लिए वेतन मांगता हो। सब अपनी मर्ज़ी और श्रद्धा से इसमें भाग लेते हैं। उनकी मंडली में सब विद्यार्थी हैं। जैसे कि इस बार जो राम का किरदार निभा रहा है वो अभी हाई स्कूल में ही है। ये कलाकार 2-3 साल तक रामलीला में अपना किरदार निभाते हैं। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, दाढ़ी-मूछें आ जाती हैं तभी कलाकार बदले जाते हैं।

 

जितने भी स्वरुप हैं सब चौक क्षेत्र के ही स्थानीय निवासी हैं। पूरा एक महीना पूर्वाभ्यास करने के बाद दशहरे के दिन से रामलीला आरम्भ होती है। रामलीला मैदान में ही उनका पक्का मंच है जिसपर रामलीला पेश की जाती है। यही नहीं, प्रैक्टिस के दौरान मंडली का हर सदस्य, छोटा हो या बड़ा, रात 11-12 बजे तक अभ्यास करता है। गोविन्द प्रसाद शर्मा जी, राजकुमार वर्मा, ओमप्रकाश दीक्षित जैसे वरिष्ठ लोग इस रामलीला का निर्देशन करते हैं और छोटे बच्चों को उनका किरदार सिखाते हैं।

 

 

रावण की पूजा करते हैं लंकेश

विष्णु त्रिपाठी उर्फ़ लंकेश जी की एक अनोखी बात ये भी है कि दुनिया तो श्री राम की पूजा में मग्न रहती है पर त्रिपाठी जी रावण की पूजा करते हैं। वे रावण के कर्मों और उसके चरित्र से इतना ज्यादा प्रभावित हैं कि उन्होंने हवन सामग्री तैयार की है जिसका नाम है “लंकेश पूजा पाठ हवन सामग्री” जिसके लिए वे कन्नौज से जड़ी-बूटियां लाते हैं और अपने सामने पिसवा के सामग्री बनाते हैं।

 

 

“रावण को कोई समझ न पाया”

यह पूछे जाने पर कि वे रावण से इतना ज्यादा प्रभावित क्यों हैं, उन्होंने बताया कि “रावण को इंसान समझ नहीं पाए पर मैंने समझ लिया। रावण बहुत बड़ा पंडित था, बहुत बड़ा ज्ञानी था, रासायनिक विज्ञान का ज्ञाता था, नीति-विज्ञान का ज्ञाता था और बहुत बड़ा आयुर्वेदाचार्य भी था। ये हर व्यक्ति को नहीं मालूम है। एक पुस्तक लिखी गयी थी “रावण संघिता”, जिसमें कोई ऐसा रोग नहीं है जिसका आयुर्वेद में इलाज न हो। रावण जैसा बड़ा ज्ञानी कोई था ही नहीं।”

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