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दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ।

 

जज लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में SIT जांच की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन कर कांग्रेस पार्टी ने कहा कि इस मामले में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जज लोया की मौत के बाद दो और साथियों की भी मौत हुई थी। इस मामले में कई तरह के आरोप सामने आए। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा कि आज का दिन काफी दुखद है, जज लोया की मौत का जांच मामला काफी गंभीर था। उन्होंने कहा कि वो सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अमित शाह का नाम आया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी कई तरह के सवाल बाकी हैं। उन्होंने कई तरह के सवाल उठाए।

सुरजेवाला के सवाल

  • सोहराबुद्दीन और प्रजापति के केस को 2012 में जजों का ट्रांसफर किया गया था। जज उत्पत का भी ट्रांसफर कर दिया गया था।

  • जज लोया को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत, एक फ्लैट देने की पेशकश की गई थी।

  • जज लोया की मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था, लेकिन ईसीजी की रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नज़र आया था।

  • नागपुर में उनकी सुरक्षा को हटा दिया गया था।

  • जज लोया मुंबई से नागपुर ट्रेन के जरिए गए थे।

  • जज लोया के नागपुर रेलभवन में रुकने का कोई रिकॉर्ड नहीं।

  • जिस गेस्ट हाउस में जज लोया रुके हुए थे, वहां कई कमरे थे, लेकिन तीन जज उसी कमरे में ही क्यों रुके हुए थे।

  • परिवार को जज लोया के कपड़ों में गर्दन के पास खून मिला था।

  • पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में उनका नाम गलत लिखा गया था।

  • जज लोया की मौत के बाद दो अन्य जजों की भी मौत हुई जिस पर भी कई तरह के सवाल हैं।

क्या है कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले का कोई आधार नहीं है, इसलिए इसमें जांच नहीं होगी। तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है, उनपर संदेह करना संस्थान पर संदेह करने जैसा होगा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन वकीलों ने ये याचिका डाली है, उन्होंने इसके जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की है। ये अदालत की आपराधिक अवमानना करने जैसा है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ये याचिका राजनीतिक फायदे और न्यायपालिका की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए किया गया।

 

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