Jhanvi Kapoor And Arjun Kapoor Will Seen in Koffee With Karan

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

प्रख्यात कवि दुष्यंत कुमार की बहुत मशहूर लाइनें हैं - उनकी है अपील कि वो साथ हमारा दें, चाकू की पसलियों से गुजारिश तो देखिए . .।  

 

उफनाती चोक नालियां और मोहल्लों में कई स्थानों पर जमा कूड़ा। रही सही कसर मुख्य मार्ग पर खुले मेनहोल और गड्ढे पूरी कर रहे हैं। एक दशक से अधिक समय तक राजधानी में मेयर पद पर काबिज रही भाजपा के प्रत्याशी अब जनता से ही कतराने लगे हैं। वैसे यही कुछ हालत समाजवादी पार्टी की भी है क्योंकि वह सत्ता में थी। एक बार फिर ये लोगों के दरवाजे खटखटाने पहुंच रहे हैं लेकिन वह भी गुपचुप। प्रतिद्वंदी आम आदमी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी कार्यकर्ता जरूर हर इलाक में पिछले डेढ़ दशक में हुए विकास की हकीकत जरूर जनता से जानने पहुंच रहे हैं और जोरदार तरीके से बदलाव का राग अलाप रहे हैं।

विधायक और मेयर होने के बावजूद विकास के लिए जनता नाराजगी को भांपते हुए मेयर पद के प्रत्याशी जनता से सीधे सीधे रूबरू होने से कतरा रहे हैं। शायद यही वजह है कि मतदान महज सात दिन बचे हैं कि राजधानी के अधिसंख्य हिस्सों में मेयर प्रत्याशी अब तक नहीं पहुंचे हैं। इतना जरूर है कि उनकी पार्टी के पार्षद जरूर अपने पैम्फेलेट और पर्चे के जरिए मेयर का प्रचार कर रहे हैं लेकिन खुद मेयर प्रत्याशी या विधायक जनता से दूरी बनाए हुए हैं। सवाल यह है कि ऐसे में चुने जाने वाले मेयर राजधानी और राजधानी वासियों को लेकर कितना संजीदा होंगे, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। सत्तारुढ़ भाजपा तथा इसके पहले सत्ता में रही समाजवादी पार्टी की इस कमजोर नस को आम आदमी पार्टी पूरे दमखम के साथ भुनाने में लगी है। आप की मेयर प्रत्‍याशी प्रियंका माहेश्‍वरी अपनी कंपेनिंग केवल पिछले एक दशक में हुए विकास का ही हिसाब किताब करती दिख रही हैं। जबकि कांग्रेस, सपा, बसपा के मेयर प्रत्‍याशी एक-दो जगहों को छोड़कर कहीं भी प्रचार करते नहीं दिखे। गली मोह्ललों की बदहाली के लिए मुख्य तौर पर पार्षदों को जिम्मेदार माना जा रहा है। भले ही उनके वित्तीय अधिकारों में इजाफा हुआ लेकिन उससे क्षेत्रों के हालात में कोई अमूलचूल बदलाव नहीं आया। इतना जरूर रहा कि पार्षद महोदय की बेनामी संपत्तियां जरूर बढ़ गई।

अवैध निर्माण में पत्ती का जुगाड़

 

राजधानी के तकरीबन हर वार्ड में अवैध निर्माण हैं और उनमें पार्षदों की पत्ती है। यानी हिस्सेदारी। हिस्सेदारी भी सरकारी विभागों से सुरक्षा प्रदान करने कीं। यानी दिक्कत के वक्त पार्टी के बड़े नेताओं के सहारे अवैध को बचाने की जुगत। ठाकुरगंज से लेकर राजेंद्र नगर और डालीगंज से लेकर खालाबाजार –तालकटोरा तक यही माजरा है। विक्टोरिया स्ट्रीट में कई पार्षद व पूर्व पार्षद बिल्डर जरूर बन गए और कई निर्माण पर उनके होर्डिंग उनके दावों की पुष्टि कर रहे हैं लेकिन लोग वहीं रहने को मजबूर हैं।

मतदाताओं को प्रत्याशियों का इंतजार

 

इंदिरानगर के गाजीपुर निवासी राम अवतार बता रहे हैं कि बीते 10 वषों से मेरी गली में काम नहीं हुआ है, अभी तक कोई मेयर प्रत्‍याशी हालचाल लेने नहीं आया है। पार्षद दिखाई देते हैं लेकिन समस्या सुनने का समय पांच साल में नहीं निकाल पाएं। मटियारी के आशीष श्रीवास्‍तव बताते हैं कि चुनाव में मात्र एक सप्‍ताह बचा है,लेकिन अभी तक किसी भी पार्टी का कोई प्रत्‍याशी नहीं आया है। इसके साथ ही हुसैनगंज के निगम मंदिर गली निवासी राम कुमार बताते हैं कि जो काम दस वषों  में नहीं हुआ वो एक सप्‍ताह में हो गया, गडढ़ायुक्‍त्‍ गली गडढ़ा मुक्‍त गली हो गई है।

सदर निवासी देव कुमार ने बताया कि हमारे क्षेत्र का विकास दस वर्षो से रुका हुआ है, पूरे मोहल्‍ले में पानी की समस्‍या है, लेकिन आज तक समाधान नहीं हो सका, यही वजह से कोई प्रचार करने नहीं आ रहा है। उन्‍हें पता है कि यहां पहुंचने पर हमारा विरोध होगा। उदयगंज के अजीत कुमार में भी बीजेपी के वर्तमान मेयर के प्रति बेहद नाराजगी है, उनका कहना है कि बीते पांच वर्ष पूर्व वोट लेकर तो चले गए,इसके बाद क्षेत्र  में झांकने तक नहीं आए। नजर बाग की कोमल शर्मा का भी यहीं कहना है कि जितने के बाद क्षेत्र को देखने कोई नहीं आता है।

 

त्रिवेणी नगर के विनय अवस्‍थी बताते हैं कि अभी तक मेरे क्षेत्र में कोई भी मेयर प्रत्‍याशी नहीं आया है, शिवाजीपुरम के धमेन्‍द्र सक्‍सेना, और सर्वोदय नगर के उमेंद्र का भी यहीं कहना है। काम न किए जाने की वजह से कोई प्रत्‍याशी नहीं आया है।

 

 

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