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हर तरफ, हर जगह बेशुमार हादसें

UP | Last Updated : Nov 20, 2017 06:51 PM IST
  • ट्रामा ट्रीटमेंट के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित डॉक्टर
  • हर साल होती है 17 हजार से ज्यादा मौतें

Case of Road Accidents in Uttar Pradesh


दि राइजिंग न्‍यूज

अमित सिंह  

लखनऊ।

 

उत्तर प्रदेश यानी देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाला शहर और यहां पर हर साल 17 हजार से ज्यादा लोगों की जान सड़क दुर्घटना में जाती हैं। खास बात यह है कि हादसों में मरने वालों में बड़ी संख्या 14 साल से कम आयु वाले हैं जो उचित उपचार के अभाव में बच नहीं पाते हैं।

इसकी वजह हमारी बदहाल ट्रामा सेवाएं हैं। नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक हादसों के कारण करीब आठ लाख 80 हजार बच्चों के कोई न कोई अंग हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अब आकस्मिक ट्रामा सेवाओं के लिए दक्ष डाक्टरों की तैयार करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। 

 

 

केजीएमयू के पीडियाट्रिक ओर्थोपेडिक विभाग के हेड डॉ अजय सिंह ने बताया कि 10 वर्षों में देश में ट्रामा केस जबरदस्त तरीके से 64 प्रतिशत बढ़ गई हैं। डॉ अजय सिंह ने बताया कि यह बेहद खराब स्थिति है कि हादसा बच्चों के ट्रामा के इलाज के लिए कोई विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था नहीं है।

यहां बच्चों का एक्सीडेंट होने पर भी वही डॉक्टर इलाज करते हैं जो बड़ों का इलाज करते हैं। लिहाजा तमाम बच्चे सही उपचार न मिलने या फिर चोट की तस्दीक न हो पाने के कारण जान गवां देते हैं। विदेशों में बच्चों के ट्रामा में इलाज करने वाले चिकित्सक अलग होते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 40 प्रतिशत चोटों का इलाज समय से नहीं हो पाता है।

 

 

डॉ अजय सिंह ने बताया कि वह कोलम्बो में 13 से 15 अक्टूबर में हुई वर्ल्ड एकेडमिक कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करने गए थे। इसमें यूएसए, श्रीलंका, घाना, यूएई, जापान, टर्की, क़तर, सिंगापुर, मलेशिया और स्वीडन के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया था। उन्होंने बताया कि इस सम्मलेन में विकासशील देशों में बढ़ते ट्रामा पर चिंता जताई गयी तथा कहा गया कि इन देशों को ऐसी योजनायें बनानी चाहिए जिससे ट्रामा की दर में कमी आये।

उन्होंने बताया कि देश में इस तरह के सुधार के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से मेडिकल कॉलेजों में ट्रामा के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को तैयार करने के लिए ऐसे कोर्स शुरू करने की इजाजत देनी होगी। इसका पूरा खाका तैयार करना होगा।

 

 

गोल्डेन मोमेंट में उपचार ही नहीं मिलता

सड़क हादसे के बाद पहले पंद्रह मिनट को गोल्डेन मोमेंट माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि देश में सबसे ज्यादा मौतें होने के बावजूद प्रदेश में ट्रामा सर्विस की सबसे खस्ता हालत है। परिवहन गंभीरता का आलम इसी से लगाया जा सकता है कि सड़क सुरक्षा के नाम पर विभाग ने इंटरसेप्टर तो खरीद डाले, लेकिन इनका इस्तेमाल हाईवे पर भारी वाहनों से वसूली और चालान करने में हो रहा है।

केवल यही नहीं, परिवहन विभाग के हर जोन में महज एक ही इंटरसेप्टर है, जबकि एक जोन में आधा दर्जन से ज्यादा जिले हैं। मगर इसे देखने की फुरसत तक किसी को नहीं है।



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