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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

निराला नगर में रामकृष्ण मठ के पास स्थित एक गेस्ट हाउस। कैटरिंग से लेकर सजावट तक सारा इंतजाम मगर सब कुछ नगद। अगर भुगतान चेक से करें तो कीमत में पांच फीसद का इजाफा। नगद भुगतान करने पर तय भुगतान पर कुछ छूट। दरअसल एक तरफ सरकार गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू करने बाद टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने की कवायद में जुटी है तो दूसरी तरफ कारोबारी टैक्स चोरी करने के लिए सारे हथकंडे अपना रहे हैं। अशोक मार्ग पर श्रीराम टावर के नजदीक स्थित एक होटल में कभी एटीएम दुरुस्त नहीं होता है। हर बार एटीएम में नेटवर्क की दिक्कत बता कर नगद भुगतान का अनुरोध किया जाता है।

 

दरअसल टैक्स चोरी के लिए नगद धंधा खूब फलफूल रहा है। दरअसल पूरा खेल चल रहा है टर्नओवर और आय को छिपाने के लिए। इसका सबसे मुफीद जरिया बन गया है नगद व्यवहार। कार्ड हो या चेक से भुगतान पर पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंचता है, इस कारण उसे छिपाना दिक्कत तलब होता है। इस कारण से कारोबारी चेक –कार्ड से परहेज कर रहे हैं। दूसरी तरफ टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने में कामर्शियल टैक्स महकमा भी फिलहाल तमाशबीन की भूमिका में ही दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ बढ़ती टैक्स चोरी के मद्देनजर कामर्शियल टैक्स विभाग ने सचल इकाईयों को सतर्क कर दिया है। अपर आयुक्त के मुताबिक सभी हाईवे व रेलवे स्टेशन पर जांच बढ़ा दी गई है।

धड़ल्ले से खपाया जा रहा है टैक्स चोरी का माल

 

सरकार की नाक के नीचे दूसरे प्रांतों से मंगाया गया टैक्स चोरी का माल विभिन्न बाजारों में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। इसकी खुलासा तीन दिन पहले फैजाबाद में कामर्शियल टैक्स विभाग की सचल टीम ने किया था। इसमें दस लाख रुपये से अधिक सामान लखनऊ  के लिए आ रहा था। केवल रेलवे ही नहीं बल्कि ट्रांसपोर्ट से भी फिलहाल टैक्स चोरी के माल का परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। चारबाग रेलवे स्टेशन पर सक्रिय एजेंट ही अब ट्रांसपोर्टर भी बन गए हैं और उनके द्वारा रेलवे मंगाकर होजरी, किराना और इलेक्ट्रानिक्स का सामान आसपास के शहरों –कस्बों में पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए गलत जीएसटीएन का भी धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। सबकुछ कामर्शियल टैक्स विभाग की जानकारी में हो रहा है लेकिन अधिकारी आंख मूंद कर केवल अपनी जेब भरने में व्यस्त हैं।

कम हो गया राजस्व

 

जीएसटी लागू होने के बाद प्रवर्तन कार्रवाई पर लगी लगाम तथा अधिकारियों की लामबंदी के चलते  प्रदेश में राजस्व वसूली कम हो गई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पान मसाला, किराना सहित कई अन्य ट्रेड में सरकार को पिछले साल के मुकाबले पंद्रह से बीस फीसद तक कम राजस्व प्राप्त हुआ है। इसकी मूल वजह इंफोर्समेंट का प्रभावी न होना है।

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