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दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

आज आठ मार्च का दिन है और इसे पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। देश में कई बेटियों की कहानी ऐसी है, जिन्होंने मुश्किलों से लड़ते हुए खुद का लोहा मनवाया। इन महिलाओं में अरुणा बी रेड्डी, अवनी चतुर्वेदी, श्रद्धा भंसाली, सविता पूनिया, अरुणिमा पटेल जैसे बड़े नाम हैं। वहीं कानपुर की एक ऐसी महिला हैं जो खतरों से खेलते हुए देश को अपनी सेवा दे रही हैं।

रेलवे हाईटेंशन लाइन की देखरेख ऊषा के हवाले

हाईवोल्‍टेज करंट वाली रेलवे लाइन की मरम्‍मत का जिम्‍मा पिछले दस साल से शहर की एक महिला संभाल रही है। नौबस्‍ता आवास विकास की रहने वाली ऊषादेवी शुक्‍ला पिछले दस साल से यह काम कर रही हैं। ट्रैक पर पॉवर वैगन से फॉल्‍ट वाली जगह पर टीम के साथ पहुंचना, इंजीनियरों के साथ लाइन की मरम्‍मत का काम करना, वैगन से चढ़ना और उतरना दिलेरी भरा काम है।

रेलवे इंजीनियर महेश कुमार शुक्‍ला की मौत के बाद नौकरी पाईं ऊषा बताती हैं कि शुरुआत में यह काम जोखिम भरा लगता था, लेकिन हिम्‍मत नहीं हारी। अब डर खत्‍म हो गया है। कानपुर में वह रनिंग स्‍टाफ वाली अकेली महिला कर्मचारी हैं। उनका काम लाइनों में प्रवाहित करंट के झटके को रोकना है, जिससे काम के दौरान कोई दुर्घटना न हो।

 

 

कभी-कभी उन्‍हें इस काम के लिए घंटों ट्रैक पर ही खड़े रहना पड़ता है। ऊषा के दो बेटे हैं जिनमें से एक, अमित शुक्ला डायरेक्टर (icaremedi.com) हैं और दूसरा बेटा विपिन शुक्ला आरओ वाटर का काम करता है।

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