Neha Kakkar Crying gets Emotional in Memories of Ex Boyfriend Himansh Kohli

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

1984 में दिल्ली के बाद यूपी के कानपुर में ही सिखों के खिलाफ सबसे भयावह दंगे हुए थे। इस दंगे के 35 साल बाद योगी सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए पूर्व डीजीपी अतुल की अध्यक्षता में चार सदस्यों वाली एसआइटी गठित की है, जो छह माह में जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सिखों को साधने के लिए योगी सरकार ने दांव चला है।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिख समुदाय के खिलाफ दंगे हुए थे। इनमें दिल्ली के बाद यूपी का कानपुर में सबसे भयानक दंगे हुए थे, जिनमें 127 सिखों की मौत हुई थी। कानपुर में बजरिया, नजीबाबाद, पीपीएन मार्केट सहित शहर के कई इलाकों में सिखों के साथ मारकाट हुई थी। इनमें सिखों की दुकानें लूट ली गई थीं और उनके मकानों को आग के हवाले कर दिया था।

मामले में बहुत दिनों तक नहीं दर्ज की गई कोई FIR

कानपुर में 300 से ज्यादा सिखों के मारे जाने और सैकड़ों घर तबाह होने के आरोप लगे थे। हालांकि, सिख दंगे की जांच करने वाले रंगनाथ मिश्रा आयोग ने दंगों में 127 सिखों की मौत के मामले को दर्ज किया था। सिखों का कहना है कि एक नवंबर को कानपुर में सिखों का कत्लेआम किया गया था, लेकिन इस मामले में बहुत दिनों तक कोई एफआइआर दर्ज नहीं की गई।

हालांकि, बाद में जब एफआइआर दर्ज की गई तो स्टेटस रिपोर्ट में कोई पुख्ता सबूत न होने की बात कहकर केस खत्म कर दिया गया था। सिखों ने आरोप लगाया था कि दंगे में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी, लेकिन महज 127 लोगों की हत्या की एफआइआर दर्ज किए गए। यूपी प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मनजीत सिंह की याचिका पर सरकार को कानपुर के बजरिया और नजीबाबाद इलाकों में सिख दंगों को दौरान दर्ज हुए मामलों की जांच के लिए एसआइटी के गठन के निर्देश दिए थे। इसी पर यूपी सरकार ने एसआइटी गठन का फैसला किया है।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement