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दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

शुक्रवार को प्रांतीय व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में सिविल लाइंस स्थित मंडलायुक्त कार्यालय में पॉलीथिन प्रतिबंध के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया। व्‍यापारियों ने मंडलायुक्त के माध्यम से मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को संबोधित ज्ञापन दिया और मांग की गई कि व्यापारियों के पेट पर इस तरह से लात न मारें।

सूबे की सरकार ने 15 जुलाई से 50 माइक्रोन के नीचे प्लास्टिक पॉलीथिन के प्रयोग पर बैन लगा दिया गया, जिससे प्रदेश के प्लास्टिक व्यापारी वर्ग को व्यापार में काफी नुकसान हुआ है। अब 15 अगस्त से डिस्पोजेबल क्रॉकरी को भी प्रतिबंधित किया जा रहा है। इस निर्णय के बाद से प्लास्टिक के अन्य उत्पादों को लेकर व्यापारी बेहद परेशान है। जिसको लेकर नगर के व्यापारी लगातार सीएम से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई।

बर्बाद हो गया प्रदेश का व्‍यापारी वर्ग

प्रांतीय व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु गुप्ता ने बताया कि हम सभी व्यापारी सरकार का ही एक हिस्सा हैं। कम से कम हमारा पक्ष तो सुनें कि व्यापारी की आखिर क्या समस्या है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के इस विंग से प्लास्टिक का व्यापार सालाना लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का है। उससे कितना बड़ा नुकसान व्यापार में, राजस्व के रूप में, रोजगार के रूप में, सही मायने में पर्यावरण के रूप में हो सकता है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

सरकार एक तरफ बात कर रही है। कम से कम व्यापारियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दें। प्लास्टिक के प्रतिबंध होने से प्रदेश का व्यापारी बर्बाद हो गया है। लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इससे प्रदूषण कम तो नहीं होगा बल्कि और बढ़ जाएगा।

प्‍लास्टिक का नहीं दिख रहा कोई विकल्‍प

उन्‍होंने कहा, अगर आप कागज के उत्पादों का प्रयोग करते हो तो कागज तो पेड़ से बनता है, तो क्या आप कागज के लिए पेड़ काटेंगे। इससे पर्यावरण को तो और नुकसान पहुंचेगा। अभी प्लास्टिक को लेकर इतनी दुविधा है कि व्यापारी को पता ही नहीं कि सरकार क्या बंद करना चाहती है और क्या चलाना चाहती है। सरकार सफाई पर ध्यान तो दे नहीं रही, केवल व्यापारियों के पीछे पड़ी हुई है।

किसी भी प्राकृतिक आपदा में यही प्लास्टिक डिस्पोजेबल सबसे ज्यादा काम आते हैं। प्लास्टिक का विकल्प तो कुछ दिख नहीं रहा है। तमिलनाडु में जिस तरह राजगोपालन फार्मूला चल रहा है, वैसे ही उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जाए।

बंद हो व्यापारियों का उत्पीड़न

प्लास्टिक, पॉलीथिन, बैग्स व डिस्पोजेबल का इस्तेमाल रोड बनाने में हो, इससे सस्ती और टिकाऊ रोड बनेंगी। इसलिए ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की है कि व्यापारियों को खलनायक न बनाया जाए। अधिकारियों द्वारा डिस्पोजेबल कारोबारियों का उत्पीड़न न किया जाए और माइक्रोन की पॉलीथिन, डिस्पोजेबल दो अक्टूबर के बाद बंद न किए जाएं। उन्‍होंने कहा, यदि हमारी मांग नहीं मानी गयी तो व्यापारी बड़ा आंदोलन करेंगे और उच्चतम न्यायालय तक जाने को बाध्य होंगे।

इस अवसर पर हरप्रीत सिंह बब्बर, संजय बिस्वरी समेत तमाम व्यापारी मौजूद रहे।

 

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