Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

तीन तलाक के विरोध में अब सुन्नी उलमा मशावरती बोर्ड अपने साथ ख्वातीन (महिलाओं) को भी शामिल करेगा। तलाक-ए-सलासा (फौरी तीन तलाक) के मुद्दे पर बनाए जा रहे कानून का विरोध किया जाएगा। इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप करार दिया गया। फौरी तौर पर तलाक न हो इसके लिए मस्जिदों के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

 

 

जाजमऊ में मशावरती बोर्ड की हुई बैठक में उलमा-ए-दीन ने हिस्सा लिया। यहां बोर्ड के चुनाव से लेकर फिलहाल तीन मुद्दों पर आम सहमति बन गई। निर्णय लिया गया कि तलाक-ए-सलासा से संबंधित एक किताब्चा (बुकलेट) जारी की जाए। इसमें तलाक के कुरआनी तरीके को बताया जाएगा। एक बार में तीन तलाक से होने वाली परेशानियों आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसे व्यापक स्तर पर बांटा जाएगा। मस्जिदों के माध्यम से व्यापक अभियान भी चलाया जाएगा ताकि लोग फौरी तीन तलाक से बचें।

 

 

इसमें एक सर्वे का भी जिक्र किया गया जिसमें 10 शहरों के परिवार न्यायालयों के आंकड़े दिए गए हैं। इसमें मुस्लिम समुदाय से जुड़े विवाद तीसरे स्थान पर हैं। उलमा ने कहा कि तलाक से जुड़े मामले मुस्लिम समाज में सीमित हैं। इसे जागरुकता से और कम किया जा सकता है।

 

 

मशावरती बोर्ड महिलाओं की एक कमेटी का भी गठन करेगा। इसका नेतृत्व उलमा करेंगे। महिलाओं की एक ऐसी कमेटी का गठन भी किया जाएगा, जिसमें सभी धर्मों की महिलाएं शामिल होंगी। यह महिलाएं अपने अधिकारों के लिए अपना पक्ष रखेंगी। विरोध प्रदर्शन को लेकर चर्चा तो हुई, लेकिन फिलहाल आम सहमति नहीं बन सकी।

 

 

सुन्नी उलमा मशावरती बोर्ड का चुनाव अगली बैठक में होगा। इसका एक एजेंडा तैयार होगा। बोर्ड के ओहदेदारों की सदस्यता फीस 500 और सदस्यों की 50 रुपए वार्षिक होगी। कुछ अन्य मुद्दों की जिम्मेदारी मौलाना हाशिम अशरफी और हाजी मोहम्मद सलीस को दी गई।

बैठक में शहर काजी मौलाना रियाज अहमद हशमती, मौलाना हाशिम अशरफी, हाजी मोहम्मद सलीस, मौलाना मुश्ताक मुशाहिदी, मौलाना कादरी शाहिदी और सैय्यद मोहम्मद अतहर कादरी आदि मौजूद थे।

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