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दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

आधुनिकता की चादर ओढ़े जिंदगी अब हॉइटेक होने के नाम पर इंटरनेट की गुलाम सी हो गयी है। यही वजह है कि आज बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की जिंदगी मानसिक रोग से जूझ रही है। हालात यह है कि परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बात करने के बजाय इंटरनेट से जूझते हैं और अपने संबंधों को दांव पर लगा देते हैं। कुछ ऐसे ही गंभीर हो चुके हालातों पर चर्चा करने और उनके निदान के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

इस रोग का ज्ञान होना बहुत आवश्यक

कानपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता करते हुए शहर के नामचीन मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर रवि कुमार और डॉक्टर आर. के महेन्द्रू ने बताया कि आज के दौर में इंटरनल और एक्सटर्नल समस्या प्रमुख कारण हैं, इस बीमारी का। साथ ही इंटरनेट की समस्या भी प्रमुख है, जिससे जूझ रहे युवाओं और बच्चों में कई तरह के मानसिक रोग पनप रहे हैं। इन रोगों के बारे में इनको भी जानकारी नहीं हो पाती। इन्‍हीं सब जरूरतों को लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी व यूथ मेंटल हेल्थ स्पेशलिटी सेक्शन के द्वारा 11 नवंबर को एकदिवसीय व्याख्यान सुबह 10 बजे से भारत वर्ष के प्रसिद्ध मनोरोग विशेषज्ञों की मौजूदगी में किया जाएगा। जिस पर वह गहनता से अपने व्याख्यान हाल में मौजूद ऑडियंस के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम द्वारा कई टॉपिक्स पर एक्सपर्ट्स अपने व्याख्यानों से मनोरोग से जूझ रहे युवाओं की समस्याओं का निराकरण भी किया जाएगा। जिस रफ्तार से यह बीमारी बढ़ रही है, जोकि यूथ में कहीं ज्यादा है, 2020 तक यह बीमारी नंबर-1 हो जाएगी। खास बात है कि आज यूथ्स में स्ट्रेस, इंटरनेट एडिक्शन, गैजेट्स, नशे की लत, अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर और झगड़ालू प्रवृत्ति इनके मुख्य कारण हैं, जिससे यह मानसिक रोग उतपन्न होने लगता है।

व्यायाम और म्यूज़िक से जल्दी ठीक हो सकते हैं

इनके बचाव के लिए मुख्य चीज़ है- ज्ञान। इनमें पैरेंट्स देखे की बच्चों के अंदर क्या परिवर्तन आ रहा है, जिस पर वे एक्सपर्ट की राय ले सकते हैं और इसकी अच्छी-अच्छी दवाइयां भी आज उपलब्ध हैं। व्यायाम, मेडिटेशन, म्यूजिक से इस बीमारी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है क्योंकि इन सबसे दिमाग को रिलेक्स फील होता है।

 

 

बच्चों ने अपनी दिनचर्या इंडोर जेनरेशन तक सीमित कर ली

इस कार्यक्रम के ऑर्गनाईज़र डॉक्टर गणेश शंकर ने बताया कि इस कार्यक्रम में यूथ मेंटल हेल्थ स्पेशिलिटी सेक्शन द्वारा यूथ्स के लिए यह कार्यशाला बड़े स्तर पर आयोजित की जा रही है। खास तौर पर इस आयोजन में इंटरनेट से जुड़ी हुई समस्याओं के बारे में विशेष रूप से चर्चा होगी। बच्चे, यूथ्स ने अपनी दिनचर्या इंडोर जेनेरेशन तक सीमित कर ली है। पहले बच्चे और यूथ्स शारीरिक खेल पर ध्यान देते थे जो आज कहीं न कहीं कम हुआ है और इसका मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और इंटरनेट है। जिससे मनोरोग की समस्याएं उतपन्न हो रही हैं और उनकी मानसिकता प्रभावित हो रही है। इसमें पहला स्पीच भी एक्सपर्ट्स गैजेट्स एडिक्शन पर ऑडियंस के सामने बताएंगे।

उन्‍होंने कहा, हम सभी एक्सपर्ट्स के साथ चर्चा भी करेंगे कि कैसे इस महामारी को रोका जा सकता है। सिंगापुर में यह नियम आया है कि स्कूल में बच्चे मोबाइल नहीं ले जा सकते और 8 बजे के बाद वहां इंटरनेट बंद हो जाता है। कुछ ऐसा ही यहां करने की भी जरूरत है, जिसको लेकर हम सभी एक्सपर्ट्स के साथ विशेष चर्चा करेंगे। इस अवसर पर डॉक्टर धनंजय चौधरी भी मौजूद रहे।

 

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