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दि राइजिंग न्यूज़

कानपुर।

 

राष्ट्रीय तकनीकी दिवस के मौके पर डीएमएसआरडीई ने एक प्रदर्शनी लगाकर राष्ट्र हित के लिए नई तकनीकों का निर्माण किया। आपको बताते चलें कि भारत में डीआरडीओ के 52 लैब हैं लेकिन उनमें से कानपुर डीएमएसआरडीई में ही ये तकनीक विकसित की गई है। मेक इन इंडिया की तर्ज पर कानपुर डीएमएसआरडीई ने रिसर्च कर एमएसपीसीई सूट्स का निर्माण किया है जो अब जवानों को दुश्मन पर हमला बोलने के लिए काफी सहायक सिद्ध होंगे। इस सूट से दुश्मनों को जवानों के आने की जरा सी भी आहट नहीं होगी। साथ ही दुश्मन जवानों को देख भी नहीं पाएंगे क्योंकि ग्रीन जगहों वाले इलाकों में यह ड्रेस पेड़ की तरह काम करेगी और जवान उसे पहनकर अपने आप को छुपा भी सकता है।

अब दुश्मनों की खैर नहीं

इस सूट से अब दुश्मन की खैर नहीं, क्योंकि जवान इन्हें धारण कर दुश्मनों के बंकर पर हमला बोल सकते हैं।

एमएसपीसीई सूट्स की खासियत

  • एमएसपीसीई सूट हैं जिनमें कॉम्बेड गेयर ऊपर रहता है। इससे जवान फायरिंग भी कर सकते हैं।

  • एमएसपीसीई पोंनशो- जिसमें जवान अपने आप को पूरी तरह छिपाकर क्रोल्लिंग करते हुए दुश्मनों पर हमला बोल सकते हैं

  • इसमें 5 से 6 जवानों का ट्रूप होता है, टेम्परेचर शेल्टर की तरह प्रयोग करते हैं। इस भारतीय तकनीक को तैयार करने में 2 वर्ष का समय लगा है।

डॉक्टर केके गुप्ता ने बताया कि इस तकनीक से दुश्मन अब दूरबीन या रेडार के माध्यम से जवानों की हरकत को नही देख सकेंगे। इस सूट में रिफ्लेक्सन 30 परसेंट,अब्सॉर्बसन 30 परसेंट व ट्रांसमिशन 20 परसेंट है। यहां मरुस्थली वाली जगहों या बर्फीली पहाड़ियों वाले सुट्स का भी विकास किया गया है जो जवानों तक पहुंचाया जा रहा है। इस सूट को बनाने में दो साल का समय लगा है। इसका ट्रायल हो चुका है और 60 हज़ार के लगभग एमएसपीसीई सूट के ऑर्डर आ चुके हैं जो आर्मी को पहुंचाए जा रहे हैं। जल्द ही और भी फोर्सेज को पहुंचाया जाएगा

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