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दि राइजिंग न्यूज़

कानपुर।

 

भारत ने पोखरण में पहला सफलतापूर्वक उच्च क्षमता का परमाणु परीक्षण 11 मई 1998 को किया था जिसके बाद से देश शक्तिशाली राष्ट्र की श्रेणी में शामिल हो गया था। उसी के तहत शुक्रवार को कानपुर  डीएमएसआरडीई में हर वर्ष की भांति 11 मई की तारीख को राष्ट्रीय तकनीकी दिवस मनाया गया। इस बार तकनीकी दिवस के उपलक्ष्य में तकनीकी की प्रदर्शनी संस्थान में लगाई गई जहां मेक इन इंडिया के तर्ज पर कानपुर डीएमएसआरडीई ने एक ऐसी मॉड्यूलर बुलेट प्रूफ जैकेट का इज़ाद किया है जिसे अब एके 47 समेत कई बड़े हथियार इसको भेद नहीं सकते। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये दुनिया की इलकौती बुलेट प्रूफ जैकेट है जिसे दुनिया का कोई भी अत्याधुनिक हथियार भेद नहीं सकता।

हार्ड स्टील कोर से तैयार किया गया सुरक्षा कवच

अभी तक जो बुलट प्रूफ जैकेट जो जवानों को दी जाती थी वह लाइट स्टील कोर की बनती थी लेकिन कानपुर डीएमएसआरडीई के ये तकनीक से अब जो जैकेट जवानों तक पहुंचेंगी वह हार्ड स्टील कोर से बनी होंगी। डीएमएसआरडीई के कार्यकारी निदेशक एस बी यादव ने बताया कि इस जैकेट को भेदने वाली आज तक कोई गोली ही नही बनी। इस जैकेट का रिसर्च कर ट्रायल लेने व इसे बनाने में लगभग 5 साल का समय लग गया। ऐसी शक्तिशाली बुलेट को रोकने के लिए ही इस जैकेट में पॉलीमर, बोरान कार्बाइट की प्लेट लागाकर इसे तैयार किया गया है और अल्ट्रा हाई मोलकुलर पाली एथिलीन का भी प्रयोग किया गया है। इसकी हार्डनेस इतनी ज्यादा होती है कि शक्तिशाली बुलट को भी तोड़ सकती है ऐसे में कहीं से भी फायरिंग की जाए इस सुरक्षा कवच के ज़रिए जैकेट पहना हुआ जवान सुरक्षित रहेगा। इसका वजन 10.4 किलोग्राम है।

अब तक आर्मी की तरफ से 1 लाख तक के इस जैकेट के ऑर्डर आ चुके है। अभी इस जैकेट को केवल आर्मी को दिया जा रहा है जल्द ही बीएसएफ और पैरामिलिट्री फोर्सेज को भी इसका लाभ मिलेगा।

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