Pregnant Actress Neha Dhupia Shares Her Opinion on Pregnancy

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

कानपुर का हैलट अस्‍पताल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब यहां के डॉक्टर्स की संवेदनहीनता सामने आई है। बाहर से दवा न लाने पर उन्नाव में सड़क हादसे में घायल दो दोस्तों का हैलट इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर्स ने इलाज नहीं किया। दोनों घायलों को इमरजेंसी से बाहर कर दिया। इसके बाद दवा का बकाया बिल न चुकाने पर मेडिकल स्टोर संचालक ने भी घायलों को रोक लिया।

दोपहर में घायलों के एक रिश्तेदार के बिल चुकता करने के बाद परिजन घायलों को वहां से ले जा सके। इस मामले को डीएम विजय विश्वास पंत ने गंभीरता से लिया है। डीएम ने इमरजेंसी में डॉक्टर्स से घायलों को भगाए जाने से बारे में सवाल-जवाब किए।

मेडिकल स्‍टोर से दवा लाने को दिया पर्चा

रविवार दोपहर उन्नाव के मकदूम नगर निवासी राजपाल और शिव बरन सड़क हादसे में घायल हो गए थे। रात करीब नौ बजे परिजन घायलों को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे। उनके साथ आए मकदूम नगर के पूर्व प्रधान विनोद ने बताया कि इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर्स ने घायलों का पर्चा बनवाया। फिर परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवा लाने के लिए पर्चा थमा दिया। परिजन ढाई हजार रुपये देकर दवाएं ले आए। बाकी बिल बकाया कर दिया।

डॉक्‍टर्स ने बंद कर दिया इलाज

परिजनों ने जूनियर डॉक्टर्स से कहा कि बाहर से दवाएं खरीदने के लिए अब पैसा नहीं है। इस पर डॉक्टर भड़क गए और इलाज बंद कर दिया। सोमवार सुबह दोनों को इमरजेंसी से बाहर कर दिया। तीमारदार घायलों को घर लेकर जा रहे थे, तभी मेडिकल स्टोर वाले ने उन लोगों को रोक लिया। कहा बिल चुकाओ, तभी यहां से जा सकोगे। बाद में रिश्तेदार ने बिल चुकाया।

ईएमओ का बयान

वहीं, मामले पर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय ने बताया कि सोमवार को उनकी सुबह की पाली में ड्यूटी थी। वह ड्यूटी पर पहुंचे और बाहर पड़े मरीजों के बारे में पूछा। शिव बरन और राजपाल को अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए। परिजनों ने भर्ती कराने से इंकार कर दिया। रविवार रात में क्या हुआ, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।

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