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दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

बहुचर्चित दिव्या हत्याकांड मामले में आठ साल बाद पीड़ित परिवार को कोर्ट के आदेश पर न्याय मिला। आपको बताते चलें कि इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंची थी। इस मामले में एडीजे सेकेंड ज्योति कुमार त्रिपाठी ने केस की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। आपको बता दें कि आठ साल पहले दिव्या को स्कूल प्रबंधक के बेटे पीयूष ने रेप के बाद मार डाला था। मामले में कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त पीयूष को आजीवन कारावास देने के साथ 75 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है, जबकि उसके भाई और सहयोगी को कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इस वारदात में एक आरोपी को रिहा कर दिया गया है।  

पढ़िए पूरा मामला

गौरतलब है कि आठ साल पहले 27 सितंबर 2010 में दिव्या के साथ उसके ही स्कूल भारतीय ज्ञानस्थली में दरिंदगी के बाद हुई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गयी थी। दिव्या की मौत से पूरे कानपुर शहर में हंगामा मच गया था। महीनों चले धरना प्रदर्शन के बाद क्षेत्र के डिप्टी एसपी से लेकर एसपी तक को सस्पेंड किया गया था और डीआइजी का ट्रांसफर कर दिया गया था। इस घटना से आहत दिव्या की मां सोनू भदौरिया न्याय के मंदिर से इंसाफ की आस लगाए बैठी थीं। लंबी लड़ाई में उन्‍होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, जांच की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा बनीं, थाने और कोर्ट के कई चक्कर लगाती रहीं लेकिन अंततः उनको न्याय मिला और आरोपियों को सजा।

दिव्या रेप-हत्‍याकांड 27 सितंबर 2010 का है, जब कानपुर के एक निजी स्कूल मालिक पीयूष ने कक्षा छह की छात्रा के साथ बलात्कार कर उसे मरने के लिए घर के बाहर फेंक दिया था। उनके तीन सहयोगियों ने पीयूष का साथ देकर पीयूष को बचाने के लिए बात छिपाई थी। इस केस में आज कानपुर की सेशन कोर्ट ने बलात्कार के मुख्य आरोपी पीयूष वर्मा को उम्र कैद की सजा सुनाई है और मदद करने वाले उसके भाई सन्तोष व सह अभियुक्त मुकेश वर्मा को साधारण कारावास की सजा दी है, जबकि चंद्रपाल को बरी कर दिया गया।

अपर सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाने की पिछली तारीख 15 सितंबर मुकर्रर की थी। कोर्ट ने चार गवाहों को पहली अक्टूबर को फिर से तलब करते हुए फैसले सुनाना स्थगित कर दिया। दिव्या केस में ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब कोर्ट ने फैसले की तारीख आगे बढ़ाई हो। मगर, आज आखिरकार इन्साफ हुआ।

कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं मां सोनू

दिव्या की मां सोनू भदौरिया रूंधे गले से कोर्ट के इस फैसले से पूरी तरह संतुष्‍ट नहीं हैं। मुख्य आरोपी पीयूष वर्मा के पिता और स्कूल मालिक चंद्र पाल वर्मा को रिहा किए जाने व दो आरोपियों को कम सजा दिए जाने पर आपत्ति जतायी है और इसके खिलाफ अपीलीय कोर्ट में जाने का ऐलान किया है। सोनू का कहना है कि ऐसी घटना में यह सजा कम है, फांसी होनी चाहिए थी लेकिन एक को उम्र कैद दी गयी। मगर, दो और आरोपी संतोष और मुकेश वर्मा को जिन्होंने सब छिपाया उन्हें कम सजा दी गयी और चंद्रपाल को रिहा कर दिया। इससे संतुष्ट नहीं हूं इन लोगों ने पीयूष को बचाने के लिए सब छिपाया था और सब गलत बताया था, अब आगे हाईकोर्ट का सहारा लेंगे।

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय भदौरिया ने बताया कि बहुचर्चित दिव्याकांड में पुलिस की जांच के 27 दिन के बाद इसकी जांच सीबीसीआइडी को दे दिया गया। जिसमें आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने के बाद मुकदमा शुरू हुआ, जिसमें दो बिंदुओं पर जोर दिया एक डीएनए और आरोपी पीयूष वर्मा की उपलब्धता उस क्षेत्र में कहा थी। जिसमे डीएनए की स्वीकार्यता 99.99 प्रतिशत है। इसमें जो मुकेश वर्मा उन्नाव में थे दिव्या की मां सोनू भदौरिया ने 28 सितंबर 2010 को ही पीयूष के खिलाफ शिकायत की बेटी के साथ दुराचार हुआ। उसके बावजूद 16 दिन तक उसे गिरफ्तार नहीं किया गया, इसमें पुलिस की लापरवाही साफ दिखाई दी थी। न्याय न मिलने के बाद सोनू ने हाईकोर्ट में सीबीआइ जांच की मांग की थी जो मामला अभी तक लंबित चल रहा था।

तत्कालीन शासन ने इस मामले की सीबीसीआइडी जांच की जिसमें मुख्य बिंदु डीएनए और पीयूष की क्षेत्र में उपलब्धता और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया थापीयूष को आजीवन कारावास और 10 वर्ष की सजा दी गयी है, जबकि दो अन्य लोगों को कुछ सजा कम हुई है और चंद्रपाल को बरी किया गया है।

 

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