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दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के 63वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर फूलबाग स्थित आंबेडकर प्रतिमा पर भारतीय बौद्ध महासभा उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा और परित्राण पाठ का आयोजन किया गया। जहां सभी कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और उसके बाद परित्राण का पाठ किया गया।

आंबेडकर के पदचिन्हों पर चलने का लिया संकल्प

6 दिसंबर 1956 को संविधान के रचयिता डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। नानारावपार्क में अंबेडकर प्रतिमा पर भारतीय बौद्ध महासभा समिति के सदस्यों ने हाथ जोड़कर उनको नमन करते हुए पुष्प अर्पित किए और उनके बताए हुए रास्तों पर चलने का संकल्प लिया। साथ ही परित्राण पाठ भी किया।

समिति के पदाधिकारी प्रेम जी बौद्ध ने बताया कि बाबा साहब आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके बताए हुए रास्तों पर चलने का हम सभी ने संकल्प लिया है। दलितों के मसीहा बाबा साहब ने देश का लिखित संविधान का निर्माण किया। बाबा साहेब की अंतिम इच्छा बुद्धमय भारत बनाने की थी। बाबा साहब ने बहुत सी शारीरिक पीड़ा को सहते हुए अपनी अंतिम रचना “बुद्धा एंड हिज धम्मा” पूर्ण की थी। आज उनके इस महापरिनिर्वाण दिवस पर हम सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि देकर उन्हें याद किया है और उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया है।

इस अवसर पर श्रवण कुमार, डॉक्टर महादेव, के के गौतम, जे आर बौद्ध, कमल किशोर, विनोद कुमार समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

 

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