Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

अपनों से अलग परायों के बीच परिवार मिल गया। शायद सब कुछ खोने के बाद भी थोड़ी खुशियां समेटने की चाहत में बुजुर्ग दिखाई दिए। जिन्‍हें अपनी कोख में 9 माह रखकर पाला और उनकी हर जरुरतों को पूरा किया, जब वह बड़े हो गए तो माता-पिता की जरूरत नहीं समझी और छोड़ दिया। आज उनके चेहरे पर खुशी जरूर है कि परायों के बीच उन्हें ऐसा परिवार मिल गया। मगर, अपने से दूर होने का गम भी है।

ऐसा ही कुछ नज़ारा किदवई नगर स्थित वृद्धाश्रम में देखने को मिला, जहां सपोर्ट फॉउंडेशन संस्था के द्वारा इन बुजुर्गों ने भी मिल-जुलकर दीपावली सेलिब्रेट की। अपनों से ही टूटने के बावजूद भी वह अपनी ममता को न भूल सके और संस्था द्वारा उनके चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कान और उनको अपनों की कमी न महसूस हो जिसको लेकर वृद्धाश्रम में मौजूद बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों के साथ मिल-जुलकर दीपावली सेलिब्रेट की। इस अवसर पर बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों ने खुशी के दीपक जलाए और फुलझड़ी जलाई। साथ ही एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटीं और खूब गीत गाए।

 

 

 

बुजुर्गों की आंखों में दिखाई दिया बचपन

वहीं, इन बुजुर्गों के लिए तरह-तरह के व्यंजनों का भी इंतज़ाम किया गया। अपनों की दी हुई तकलीफों को भूलते हुए और अपने वह दिन याद करते हुए जब वह अपने परिवार के साथ दिवाली मनाते थे लेकिन आज उन्हें इस तरह दिवाली मनानी पड़ रही है। फिर भी वह खुश हैं, उनके चेहरों पर कुछ दर्द भी था तो कहीं कुछ खुशी की झलक भी। कहीं खुशी के आंसू भी निकल रहे थे तो अपनों के न रहने का गम भी साफ उनके चेहरों पर दिखाई दे रहा था। अपनों को याद करते हुए और बचपन की यादों को संजोए सभी बुजुर्गों ने दिवाली का पर्व मिल-जुलकर सेलिब्रेट किया।

 

 

बेटे और पति की मौत के बाद टूट गयी तो मिला सहारा

वृद्धाश्रम में दो साल पहले आयी शोभा द्विवेदी ने बताया कि मेरे पति और बेटे दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। बिल्कुल अकेले हो गए थे, फिर यहां पहुंचकर एक परिवार पाया। बेटे को याद करते हुए उनका गला भर आया और उन्हें बेटे की पति की कमी भी खली। आज बहुत अच्छा लगा कि जैसे घर में दिवाली मनाते थे, वैसे ही लगा।

 

 

80 साल की बुजुर्ग महिला रीता ने बताया कि घर के बच्चों से बात होती रहती है। लेकिन शायद परिवार को मेरा रहना कहीं न कहीं खटक रहा था, इसलिए यहां आ गयी। विद्या जी ने बताया कि प्रॉपर्टी को लेकर बेटों ने पति का नाम खराब किया, जिसके चलते यहां आ गए। बेटे पैसे देते हैं, बात भी होती है। बेटों ने मकान बेंच डाला तब से यहां आकर रह रहे हैं।

 

 

ये भी हमारी माएं हैं

सपोर्ट फाउंडेशन की अध्यक्ष ज्योति शुक्ला ने बताया कि इन बुजुर्ग महिलाओं के साथ बहुत खुशी मिलती है। घर पर तो हम दिवाली मनाते ही हैं लेकिन इनके साथ खुशी बांटने का हमें यह मौका मिलता है। उनके चेहरों पर खुशी की झलक देख बहुत खुशी मिलती है। अपने जब छोड़कर इन्हें चले जाते हैं तो तकलीफ़ क्या होती है इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता, इसलिए उनके चेहरों पर खुशी की झलक देखने के लिए मिल-जुलकर दिवाली सेलिब्रेट की है। ये सभी हमारी मां ही हैं।

वृद्धाश्रम के कॉर्डिनेटर नीलेन्द्र तिवारी ने बताया कि यहां पर घर से परेशान व टूटे हुए लोग हैं। यहां 80 लोग हैं, जिनमे 45 महिलाएं हैं बाकी पुरुष हैं। इस वृद्धाश्रम में आज उनके चेहरों पर खुशी लाने का काम संस्था ने किया है, यह सराहनीय कार्य है। इस अवसर पर पूनम सिंह, शैलजा, मानी, दीपक समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

 

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