Baaghi 2 Assistant Director Name Came in Physical Assault

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

सोमवार को कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्विवद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उप राष्ट्रपति ने कहा कि अंग्रेज हमारा पौरुष ही नहीं दिमाग भी खराब कर गए। हमारा पांच हजार साल पुराना इतिहास है। आजादी से पहले हमारी जीडीपी दुनिया में 27 प्रतिशत थी। ब्रिटश हुकूमत की लूटपाट के चलते आज सात फीसदी से नीचे है। हमारी पद्धति, हमारी परंपरा, हमारी सोच कायम रहनी चाहिए। हिन्दी भारतीय सोच है और इसे कायम रखना होगा।

 

 

 

उप राष्ट्रपति वेंकैया ने कहा कि हिन्दी के बिना हिन्दुस्तान का विकास संभव नहीं है। जब मैं पढ़ रहा था तब हिन्दी विरोधी आंदोलन चल रहा था, मैंने पूछा हिन्दी कहां है। बताया गया कि रेलवे स्टेशन पर और डाकघर में। जब मैं 1993 में दिल्ली की राजनीति में आया तो हिन्दी का महत्व समझ पाया। हिन्दी बेसिक कल्चर ऑफ इंडियन पीपल, हिन्दी हमारी संस्कृति है।

 

उन्होंने कहा कि बाहर चाहे जो भाषा बोलें लेकिन घर में मातृ भाषा में ही बात करें। देश लगातार विकास के पथ पर है। आज विदेश से लोग हमारे यहां नौकरी के लिए आते हैं। हिन्दुस्तान दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आज लोग घरो में बच्चों को मम्मी, डैडी सिखाते हैं। यह हमारे समझ में नहीं आती। लोग अम्मा, अम्मी क्यों नहीं कहते। अम्मा दिल से निकलता है और मम्मी का उचारण होठों से होता है। मातृ भाषा हमारा स्वाभिमान है। वेंकैया नायडू ने कहा कि दूसरी भाषा सीखने में कोई बुराई नहीं है लेकिन मातृभाषा का कभी अपमान न करो।

 

 

उप राष्ट्रपति ने छात्रों को मेडल और डिग्री बांटने के बाद कहा कि कृषि क्षेत्र में कम चुनौतियां नही हैं। भावी पीढ़ी को इन चुनौतियों को स्वीकार करना होगा। हमे सोचना होगा कि किसान अपने बेटे को किसान क्यों नहीं बनाना चाहता। वजह साफ है कि खेती फायदे का सौदा नहीं रही। हमें ऐसे संसाधन विकसित करने होंगे कि कृषि रोजगार के अवसर पैदा कर सके। उन्होंने उदाहरण दिया कि अटल सरकार में जब मैं ग्रामीण विकास मंत्री था तो नेशनल हाईवे के 6 लेन, 4 लेन का प्रस्ताव आया था। हमने अटल जी के सामने रखा कि ग्रामीण सड़कों को मुख्य मार्ग से जोड़े बगैर देश का विकास नही हो सकता। इसके बाद प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना शुरू की गई।

 

वेंकैया नायडू ने कहा कि कृषि क्षेत्र संकट के दौर में हैं। यदि हमने अभी से प्रयास नहीं किए तो संकट और गहराएगा। मैं मंत्रियों से भी बात करुंगा कि कृषि पाठ्यक्रम में मौजूदा समय के मुताबिक बदलाव होना चाहिए। कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए स्वायल टेस्टिंग की व्यवस्था हो। किसानों के लिए मार्केट मुहैया कराई जाए। किसानों को जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाएं। अनुसंधान, वैज्ञानिक इनोवेशन होनाचाहिए। इसमें शिक्षकों का बड़ा योगदान है। हम वेकास बैठें, ऐसे नहीं चलेगा। जल संरक्षण, पर्यावरण के अनुकूल फसलें विकसित करना होगा। तभी देश और कृषि क्षेत्र की तरक्की संभव है।

 

 

छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमें सोचना होगा कि कृषि क्षेत्र का विकास कैसे होगा। इसके लिए हमें नए आइडिया, नए इनोवेशन करने होंगे। कृषि को रोजगारपरक बनाने के लिए कृषि उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था करनी होगी। उनकी बर्बादी रोकने के सस्ते और टिकाऊ इंतजाम करने होंगे। अभी किसान के खेत में टमाटर की कीमत एक रुपए किलो होती है और आम जनता 20 से 22 रुपए खरीदती है। ऐसा क्यों है कि किसान की उपज का उसे उचित मूल्य नहीं मिलता। हमें इस पर भी सोचना होगा। यदि कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था होती तो किसान एक रुपए में टमाटर क्यों बेचता। एक रुपए किलो वाले टमाटर का कैचअप तैयार कर कंपनियां लाखों-करोड़ों का मुनाफा कमाती हैं।

 

उप राष्ट्रपति ने कहा कि इतने साल बाद बहस शुरू हुई कि राम क्या हैं। यदि राम नहीं होते तो रामनाथ कोविंद, राम सेवक, राम गोपाल, राम नाईक नाम नहीं रखे गए होते। अलग-अलग वेष-वूषा होने के बावजूद पूरा देश एक है। पिछले दिनों कुछ विश्वविवद्यालयों हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि देश में 760 विश्वविद्यालय हैं। 6-7 विश्वविद्यालयो में अशांति से कुछ नहीं होता। किसी का नाम लिए बगैर कहा कि पिछले दिनों एक विश्वविद्यालय में अफजल गुरु के अधूरे सपने को पूरा करेंगे जैसे नारे लग रहे थे। हम उनसे पूछना चाहते हैं कि अफजल गुरु ने तो भारतीय संसद पर हमला किया था। उन्होंने जिसे अधूरा छोड़ा है उसे पूरा करना चाहते हैं। सभी को कानून व्यवस्था का पालन करना चाहिए।

 

 

 

 

उप राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि कुछ लोगों को वंदे मातरम पर आपत्ति है। ऐसे लोगों से पूछा जाना चाहिए कि भारत माता की जय बोलने में क्या आपत्ति है। सबकी जय हो यही तो भारत माता की जय है। भारतीय संस्कृति के प्रति भक्ति भावना होनी चाहिए। यही देश की विशेषता है।

 

सफलता का कोई शार्टकट नहीं: रामनाईक

इससे पहले समारोह के अध्यक्ष राज्यपाल रामनाईक ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गाड़ी अब कुछ पटरी पर आई है। सीएसए की दीक्षांत में 430 को मेडल और डिग्री दी गई। इसमें 337 छात्र और 97 छात्राएं हैं। जब हम मेडल पाने वालों की मेडल की बात करते हैं तो 17 लड़कियों ने मेडल हासिल किया और 14 छात्रों को मेडल मिले। यह औसत 45 और 55 फीसदी का है। हम छात्र-छात्रओं से अपेक्षा करते हैं कि ज्ञान संकलन, अनुसंधान जारी रहे। सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता। असफलता से भी निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि उसके कारण खोजो। आपको देश, समाज का ख्याल रखना होगा। उन्होंने अपनी पुस्तक चरैवेति-चरैवेति का भी उल्लेख किया। कहा कि इसका मतलब चलते-चलते रहो।

 

समारोह में 31 छात्रों को मेडल तथा उत्थान इलाहाबाद के महानिदेशक प्रो. डॉक्टर एमपी पांडेय तथा आईसीएआर नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़ को मानद उपाधि दी गई। मंच पर सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, रजिस्ट्रार डॉ. राजेंद्र सिंह मौजूद थे। कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पेश की।

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