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दि राइजिंग न्यूज़

बिल्हौर।

 

शिक्षा व्यवस्था के प्रति शिक्षकों एवं जिम्मेदारों की उदासीनता देखते ही बन रही है। शिक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ समाज का सपना देख रही सरकार, शिक्षा व्यवस्था पर नित नई योजनाओं के साथ करोड़ों रुपए खर्च करती है। लेकिन व्यवस्था के जिम्मेदार उनके सपनों पर पानी फेर देते हैं।कु छ ऐसा ही हाल बना हुआ है क्षेत्र में शिक्षा विभाग का। क्षेत्र के 70% शिक्षक कानपुर में रहकर दूरदराज के गांव में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। वह सुबह न तो समय से विद्यालय पहुंचते हैं और न ही समय से बंद करते हैं। इसी का परिणाम है कि आज लोग अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में भेजना पसंद नहीं करते। इस विभाग के जिम्मेदार भी जस का तस रवैया अपनाए हुए हैं।

प्राथमिक विद्यालयों में शीतकालीन सत्र के अनुसार 9:00 से 3:00 तक चल रहे हैं। हालांकि माखन पुरवा गांव में बच्चे 9:30 तक बजे प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों का इंतजार कर रहे थे। इसी कड़ी में जब खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हौर वहां पहुंचे तो खंड शिक्षा अधिकारी अमर नाथ वर्मा नदारद मिले।

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