Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्‍यूज

कानपुर।

 

एक तो शहर की आबोहवा पहले से ही इतनी प्रदूषित थी वहीं दीपावाली पर पटाखों की आतिशबाजी से निकली धुंध और जहरीली हवा से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दीपावली पर्व पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। बता दें कि कोर्ट ने 10 बजे के बाद पटाखे चलाने पर रोक लगा दी थी लेकिन कोर्ट के इस आदेश का असर शहर में तो पूरी तरह से फेल हो गया। लोगों ने बेटाइम आतिशबाजी की, जिससे लोगों का सड़कों पर चलना भी दूभर सा हो गया।

शहर में कूड़े की समस्या गंभीर बनी हुई थी वहीं दीपावली के पर्व पर आतिशबाजी से आसमान में इतना धुआं हो गया था, जिससे सांस लेना लोगों का दूभर हो गया। प्रदूषण से त्रस्त मिलन ने बताया कि सरकार बिल्कुल भी इस ओर ध्यान नहीं देती। त्योहार है तो लोग पटाखे तो दिवाली पर जलाएंगे ही लेकिन उन पटाखों से निकले जहरीले धुएं से दमा-अस्थमा मरीजों को बहुत ही परेशानी हुई है। अभी दिवाली में हुई आतिशबाजी से शहर में धुंध और जहरीली हवा से हम सभी को परेशानियां हुईं। इस प्रदूषण से दिन में भी सड़क में धुंध और कोहरे जैसा माहौल रहता है। पटाखों पर पूरी तरह से रोक लग जानी चाहिए। सरकार को इस मामले में गंभीरता से सोचना होगा। अगर इसी तरह से छूट देती रही तो इस प्रदूषण से आने वाली जेनरेशन पर भी गहरा असर पड़ेगा। पहल तो सुप्रीम कोर्ट ने 2 घंटे वाली अच्छी की थी लेकिन उसका फायदा बिल्कुल भी नहीं मिला।

देखती रही पुलिस, नहीं की कोई कार्रवाई

वहीं, राकेश गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन थी कि दो घंटे पटाखे जलाये जाएं, जबकि हर थानों की पुलिस को निगरानी रखने को कहा गया था लेकिन लोगों ने 10 बजे के बाद भी पटाखे जलाये और अगले दिन भी हर तरफ पटाखे जलाए गए। पुलिस बस देखती रही लेकिन किसी पर भी कार्यवाई नहीं की। कानपुर कोई प्रदूषण से अछूता नहीं है, यह शहर तो देश में मशहूर है। अभी प्रदूषण की मार शहर झेल ही रहा था कि इन पटाखों से निकले धुएं से तो शहर की आबोहवा और बदल गयी। जिससे शहर का प्रदूषण लेवल और बढ़ गया और लोगों का सड़कों पर चलना दूभर हो गया है। जहां भी जाना होता है तो मास्क लागाकर निकलना पड़ता है।

उन्‍होंने बताया कि वाहन भी प्रदूषण को बढ़ावा देने में अहम साबित हो रहे हैं। जिस तरह से दिल्ली में तीन दिन तक ट्रकों के चलने पर रोक लगा दी गयी, उसी तरह यहां भी कुछ ऐसा ही होना चाहिए था। भारी डीज़ल वाले वाहनों से प्रदूषण बहुत बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों को सरकार देखे और जिस दिन ये वाहन चलने लगेंगे, उस दिन प्रदूषण भी ख़त्म हो जाएगा।

 

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