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दि राइजिंग न्यूज़

इंटरनेशनल डेस्क।

 

अमेरिका ने ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाते हुए दुनिया के अन्य देशों पर भी दबाव बढ़ा दिया है कि वे ईरान से दूरी बना लें। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा है कि जो देश ईरान के साथ व्यापारिक संबंध जारी रखेंगे, वे अमरीका के साथ व्यापारिक संबंधों को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे। ट्रंप ने कहा, ईरान पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। नवंबर महीने में यह पाबंदी और बढ़ेगी। ईरान के साथ जो देश संबंध जारी रखना चाहते हैं वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे।

 

उन्होंने कहा कि मैं दुनिया में शांति के लिए ऐसा कह रहा हूं, इससे कम कुछ भी नहीं। मई में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऐतिहासिक बहुपक्षीय परमाणु समझौते को तोड़ते वक्त छोड़े गए कठोर प्रतिबंधों को इस बार लागू किया गया। इसके तहत अब ईरान सरकार न तो अमेरिकी मुद्रा खरीद सकेगी और न ही अमेरिका के साथ कारों या कालीनों का कारोबार कर पाएगी। आठ मई को ट्रंप ने ईरान के साथ पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन द्वारा किया गया परमाणु समझौता तोड़ते हुए पहले चरण के प्रतिबंध लगाए थे, जिन्हें अगस्त से लागू होना था। दूसरे चरण के प्रतिबंध पांच नवंबर से लागू होंगे।

इसके लिए अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाते हुए ईरानी ऑटोमोबाइल सेक्टर और उसके साथ सोने व कीमती धातुओं के व्यापार पर भी रोक लगा दी। ईरान सरकार अब तक अमेरिकी मुद्रा की खरीदी कर सकती थी लेकिन अब उसे भी रोक दिया गया है साथ ही ईरान से अमेरिका आने वाले कालीन और अन्य उद्योगों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध मंगलवार से लागू हो रहे हैं जबकि परमाणु प्रतिबंध 5 नवंबर 2018 से लागू होगा।

 

इससे पेट्रोलियम संबंधी लेनदेन और विदेशी वित्तीय संस्थानों का ईरान के केंद्रीय बैंक के साथ लेनदेन भी रुक जाएगा। ट्रंप ने इन प्रतिबंधों को तोड़ने वालों को गंभीर दुष्परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से ईरान की नुकसान पहुंचाने वाले कार्रवाईयों को रोकने के लिए सहयोग की अपील की है। इससे ईरान की मुद्रा रियाल में और अधिक गिरावट आएगी और देश की अर्थव्यवस्था खराब होगी।

ट्रंप बोले, हम नए परमाणु समझौते को तैयार

ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान अपनी दुराग्रहपूर्ण गतिविधियां रोके तो अमेरिका उसके साथ नया परमाणु समझौता करने को तैयार है। इसके लिए ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने, बैलेस्टिक मिसाइल बनाने और आतंकवाद का समर्थन करने वाले कार्य रोकने होंगे। ट्रंप ईरानी राष्ट्रपति को मुलाकात के लिए पहल भी कर चुके हैं।

 

भारत-ईरान रिश्ते पर भी आंच

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर भारत के तेल आयात पर पड़ने की पूरी आशंका है। भारत-ईरान के बीच पारंपरिक रूप से अच्छे व्यापारिक रिश्ते हैं। भारत न सिर्फ ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है बल्कि ईरानी तेल परियोजनाओं में सहयोग भी दे रहा है। इन्हीं कारणों से ईरान ने भारत को चाबहार बंदरगाह में साझेदारी का मौका दिया है। चाबहार से होकर भारत की योजना अफगानिस्तान के लिए माल आपूर्ति की है, ताकि पाकिस्तान वाले मार्ग को दरकिनार किया जा सके। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इन पर भी पड़ना तय है।

रूहानी बोले, यह मनोवैज्ञानिक युद्ध

ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा दोबारा लगाए गए प्रतिबंधों पर ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका इस्लामिक देशों के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रहा है। रूहानी ने कहा, समझ नहीं आता कि एक तरफ अमेरिका हमारे साथ नए सिरे से परमाणु समझौते की बात कर रहा है, और दूसरी तरफ प्रतिबंध भी लगा रहा है।

 

सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित एक साक्षात्कार में रूहानी ने कहा, जब आप दुश्मन हैं और दूसरे व्यक्ति पर चाकू से वार कर रहे हैं, तब आप कहते हैं कि बातचीत करना चाहते हैं। ऐसा करना है तो पहले चाकू हटाना पड़ेगा। रूहानी ने मामला सुलझाने के लिए अमेरिका के साथ तुरंत बातचीत के विचार को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, इस्लामिक रिपब्लिक पर फिर से बैन लगाने की घोषणा करके अमेरिका अलग-थलग पड़ गया है।

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