Box Office Collection of Dhadak and Student of The Year

दि राइजिंग न्यूज़

एंटरटेनमेंट डेस्क।

पिछले साल 6 जनवरी को 66 साल की उम्र में ओम पुरी साहब इस दुनिया को अलविदा कहा। पुरी साहब का जन्म 18 अक्टूबर 1951 को पंजाब में  खत्री परिवार हुआ था।

आइये उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें:-

अपनी मौत से कुछ पहले दिए गये एक इंटरव्यू में ओम पुरी ने कहा था “मेरे जाने के बाद मेरा योगदान याद किया जाएगा। मेरे दुनिया छोड़ने के बाद, मेरा योगदान दिखेगा और युवा पीढ़ी में विशेष रूप से फ़िल्मी छात्र मेरी फ़िल्में जरूर देखेंगे।”

समानांतर सिनेमा से लेकर व्यावसायिक सिनेमा में अपने अभिनय की छाप छोड़ चुके ओम पुरी ने उस बातचीत में कहा, "मेरे लिए वास्तविक सिनेमा 1980 और 1990 के दशक का था, जब श्याम बेनेगल, गोविंद निहलानी, बासु चटर्जी, मृणाल सेन और गुलजार जैसे फ़िल्म -निर्देशकों ने उल्लेखनीय फ़िल्में बनाईं।”

बचपन में ओम पुरी जिस घर में रहते थे उसके पीछे एक रेलवे यार्ड था। रात के समय ओम घर से भागकर ट्रेन में सोने चले जाते थे। उन्हें ट्रेन से बड़ा लगाव था। इसीलिए वो बड़े होकर ट्रेन ड्राइवर बनना चाहते थे। ओम पुरी ने बचपन में काफी वक़्त अपनी नानी और मामा के साथ गुज़ारा। वहां उन्हें कुछ कड़वे अनुभव भी हुए। बहरहाल, वहीं रहते हुए उनका रुझान अभिनय की तरफ मुड़ा।

ओम पुरी ने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के एल्युमनी की लिस्ट में भी जगह बनाई जहां एक्टर नसीरुद्दीन शाह उनके सहपाठी हुआ करते थे। ओम पूरी के मुताबिक वो शुद्ध शाकाहारी थे लेकिन नसरुद्दीन शाह ने उन्हें नॉन वेज खाना सिखाया। दोनों काफी अच्छे दोस्त थे और दोनों ने एक साथ कई फ़िल्मों में काम भी किया है।

ओम पुरी ने साल 1976 में मराठी फ़िल्म “घासीराम कोतवाल” से डेब्यू किया। ओम पुरी को फ़िल्म “आरोहण” और “अर्ध सत्य” के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड भी मिला और एक इंटरव्यू के दौरान ओम पुरी ने कहा, “अमिताभ बच्चन महान एक्टर हैं और मैं उनका शुक्रगुजार हूं क्योंकि उन्होंने “अर्ध सत्य” फ़िल्म करने से इंकार कर दिया था।”

ओम पुरी बड़े पर्दे के साथ-साथ छोटे पर्दे पर भी लगातार सक्रिय रहे। साल 1988 में ओम पुरी ने दूरदर्शन की मशहूर टीवी सीरीज "भारत एक खोज" में कई भूमिकाएं निभायी जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

ओम पुरी ने साल 1976 में मराठी फ़िल्म "घासीराम कोतवाल" से डेब्यू किया। ओम पुरी को फ़िल्म "आरोहण" और "अर्ध सत्य" के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड भी मिला और एक इंटरव्यू के दौरान ओम पुरी ने कहा, "अमिताभ बच्चन महान एक्टर हैं और मैं उनका शुक्रगुजार हूं क्योंकि उन्होंने "अर्ध सत्य" फ़िल्म करने से इंकार कर दिया था।"

ओम पुरी बड़े पर्दे के साथ-साथ छोटे पर्दे पर भी लगातार सक्रिय रहे। साल 1988 में ओम पुरी ने दूरदर्शन की मशहूर टीवी सीरीज “भारत एक खोज” में कई भूमिकाएं निभायी जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

फ़िल्मों की उनकी उनकी यात्रा हमेशा शानदार रही है। उनके साथ निजी जीवन और सार्वजनिक जीवन में भी कई विवाद जुड़े रहे। लेकिन, यह भी सच है कि ओम पुरी अपने अंतिम समय तक अपने काम और शब्दों को लेकर निडर रहे।

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