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दि राइजिंग न्यूज़

एंटरटेनमेंट डेस्क।

कहते हैं सिनेमा हमें वही दिखाता है जो समाज में घटित होता है। आरुषि-हेमराज केस के बारे में भी कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है। निर्देशक मेघना गुलजार ने अपनी फिल्म “तलवार” में इस केस से जुड़े हर पहलू को दिखाने की कोशिश की थी। फिल्म में इस मामले से जुड़े हर शख्स के नजरिये को दिखाया गया है। चूंकि सीबीआइ कोर्ट अपना फैसला दे चुकी थी इस कारण फिल्म को सधे तरीके से दिखाया गया था।

आपको बता दें कि आरुषि-हेमराज डबल मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। इसमें तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया गया है। 16 मई 2008 को आरुषि और हेमराज नोएडा के सेक्टर 25 में मृत पाए गए थे।

क्या दिखाया गया है फिल्म में

फिल्म में श्रुति नामक लड़की का मर्डर हुआ है। उस रात क्या हुआ इसका विवरण श्रुति के माता-पिता के नजरिये से दिखाया गया, फिर बताया गया कि पुलिस ने जांच कर क्या निष्कर्ष निकाला, और अंत में सीडीआई (सीबीआई की जगह) का पक्ष।

सीडीआई का अधिकारी अश्विन (इरफान खान) मामले की जांच करता है और उसे यह साबित करने में सफलता हासिल कर कर जाती है कि मर्डर घर के नौकर खेमराज के दोस्त ने किया है, लेकिन लैब की रिपोर्ट ऐन मौके पर बदल जाती है। फिर वह अपने ही ऑफिस के सहयोगियों की ईर्ष्या का कारण बन जाता है। जांच का जिम्मा दूसरे ऑफिसर को दिया जाता है जो साबित करता है कि श्रुति का मर्डर उसके ही माता-पिता ने किया है। यानी कि यह मामला अधिकारियों के ईगो का प्रश्न बन जाता है और उस लड़की के प्रति उनकी कोई संवेदना नहीं रहती है जो अपनी जान से हाथ धो बैठती है।

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