Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्यूज़

एंटरटेनमेंट डेस्क

रील लाइफ में ही नहीं, अमिताभ बच्‍चन रियल लाइफ में भी खतरों से लड़ना जानते हैं। फिल्‍म कुली के सेट पर जबरदस्‍त चोट खाने के बाद उन्‍होंने किस बहादुरी से 61 दिनों तक जिंदगी के लिए जंग लड़ी थी यह किसी से छिपा नहीं है।

अमिताभ के साथ ये हादसा 24 जुलाई, 1982 को बेंगलुरु में फिल्म “कुली” की शूटिंग के दौरान हुआ था।  फिल्म “कुली” की शूटिंग बेंगलुरु में चल रही थी। फाइट सीन के बाद लोग तालियां बजा रहे थे और बिग बी के चेहरे पर मुस्कराहट थी। खबरों के मुताबिक, फिल्म के एक फाइट सीन में पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के मुंह पर लगना था, जिससे वे एक टेबल पर गिरते हैं। सीन के डुप्लीकेट बॉडी डबल के सहारे की बात भी की गई, लेकिन अमिताभ इसे खुद करने पर जोर दे रहे थे, ताकि सीन रियल लगे। सीन प्लान के मुताबिक शूट हुआ और पूरी तरह रियल लगा। सभी तालियां बजा रहे थे। अमिताभ भी मुस्कुराए, लेकिन तभी उनके पेट में हल्का दर्द शुरू हुआ। टेबल का एक कोना उनके पेट में बुरी तरह चुभ गया था।

सभी को लगा मामूली चोट है
सभी को ये चोट मामूली लग रही थी। अमिताभ होटल में आराम करने चले गए, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ।  अगले दिन यह दर्द और बढ़ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। एक्स-रे हुआ, लेकिन डॉक्टर्स को कुछ समझ नहीं आया। 26 जुलाई को अमिताभ की स्थिति और बिगड़ गई। तभी वेलोर के जाने-माने सर्जन एचएस भट्ट वहां आए हुए थे। यूनिट के कई बार आग्रह करने के बाद डॉ. भट्ट अमिताभ का केस स्टडी करने के लिए तैयार हुए। 


पेट चीरने के बाद हैरान थे डॉक्टर
27 जुलाई, 1982 को डॉक्टर्स ने ऑपरेशन का फैसला लिया। उन्होंने पेट चीरकर देखा तो हैरान रह गए। अमिताभ के पेट की झिल्ली (जो पेट के अंगो को जोड़े रखती है और केमिकल्स से उन्हें बचाती है) फट चुकी थी। छोटी आंत भी फट गई थी।   इस स्थिति में किसी भी इंसान का 3 से 4 घंटे जीवित रह पाना मुश्किल होता है। लेकिन अमिताभ 3 दिन तक इस कंडीशन से गुजरे। डॉक्टर्स ने पेट की सफाई की, आंत सिली। उस वक्त अमिताभ को पहले से ही कई बीमारियां (अस्थमा, पीलिया के कारण एक किडनी भी खराब हो चुकी थी, डायबिटीज) थीं। ऐसे में वो इतने दिन इस प्रॉब्लम से कैसे लड़े ये किसी आश्चर्य से कम नहीं था।

शरीर में फैल गया था जहर, खून भी हो गया था पतला
28 जुलाई यानी ऑपरेशन के एक दिन बाद अमिताभ को निमोनिया भी हो गया। उनके शरीर में जहर फैलता जा रहा था, खून पतला हो रहा था। ब्लड डेंसिटी को सुधारने के लिए बेंगलुरु में सेल्स मौजूद नहीं थे, जिन्हें मुंबई से मंगवाया गया।  खून में सेल्स मिलाने के बाद अमिताभ की स्थिति 4 दिनों में पहली बार कुछ सुधरी थी, लेकिन अगले ही दिन फिर उनकी हालत खराब हो गई और उन्हें जैसे-तैसे उन्हें संभाला गया। एयरबस के जरिए अमिताभ को मुंबई ले जाना तय हुआ। स्‍ट्रेचर पर लेटे अमिताभ को क्रेन की मदद से एयरबस में शिफ्ट किया गया। रात 11 बजे बेंगलुरु से निकली एयरबस 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे मुंबई पहुंची।  उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल पर स्पेशल विजिलेंस वॉर्ड में रखा गया।

 

डॉक्टर्स ने पहली बार कहा, दवा नहीं दुआ की जरूरत
2 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन किया गया।  3 घंटे तक ऑपरेशन चला और डॉक्टर्स ने पहली बार कहा कि अमिताभ की हालत नाजुक है। उन्हें दवाओं के साथ दुआओं की भी जरूरत है। इसी के साथ देशभर में अपने चहेते स्टार के लिए लोगों ने प्रार्थनाएं करनी शुरू कर दीं।  तमाम मंदिरों और धार्मिक स्थलों में लोग अमिताभ की सलामती की दुआ मांगने के लिए उमड़ पड़े।

 

खत्म हुई मौत से लड़ाई
16 अगस्त को अमिताभ की सेहत में सुधार हुआ। वो खाने-पीने लगे और कुछ कदम चले भी। लोगों की दुआएं असर दिखा रही थीं, लेकिन अभी भी उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना था। लगातार उनकी सेहत में सुधार हुआ। 24 सितंबर के दिन आखिरकार अमिताभ को ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी मिल गई। लोगों की बेकाबू भीड़ उनका इंतजार कर रही थी। ठीक होने पर अपने प्रशंसकों का धन्यवाद देते हुए अमिताभ ने कहा था, “जिंदगी और मौत के बीच यह एक भयावह अग्नि परीक्षा थी। दो महीने का अस्पताल प्रवास और मौत से लड़ाई खत्म हो चुकी है। अब मैं मौत पर विजय पाकर अपने घर प्रतीक्षा लौट रहा हूं। घर पहुंचकर उन्होंने हाथ हिलाकर अपने शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा किया।

 

डॉक्टर्स ने कर दिया था मृत घोषित
एक इंटरव्यू में उस दौरान की स्थिति का खुलासा करते हुए अमिताभ ने कहा था, “डॉक्टर्स ने मुझे मेडिकली मृत घोषित कर दिया था। जया आईसीयू रूम के बाहर खड़ी सब देख रही थीं। डॉक्टर ने कोशिश बंद कर दी थी, तभी जया चिल्लाई मैंने अभी उनके पैर के अंगूठे हिलते देखे हैं, प्लीज कोशिश करते रहिए। डॉक्टर्स ने मेरे पैर की मालिश करनी शुरू

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