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"प्रेम नाम है मेरा...प्रेम चोपड़ा"

Entertainment | Last Updated : Sep 23, 2017 11:40 AM IST

   
Happy Birthday Prem Chopra

दि राइजिंग न्यूज़

एंटरटेनमेंट डेस्क। 

बॉलीवुड के मशहूर एक्टर प्रेम चोपड़ा आज 81 साल के हो गए हैं पर आज भी वो अपने दमदार डायलॉग्स और हिट फ़िल्मों की वज़ह से हज़ारों लोगों की धड़कनों पर राज करते हैं। 23 सितंबर 1935 को लाहौर में एक पंजाबी परिवार में पैदा हुए प्रेम को बॉलीवुड के विलेन के रुप में जाना जाता है। फिल्मों में उनके ऐसे डायलॉग्स थे जो आज भी लोगों की ज़बान पर रहते हैं। 

प्रेम चोपड़ा के कुछ प्रसिद्ध डायलॉग्स

  • प्रेम नाम है मेरा...प्रेम चोपड़ा...
  • मैं वो बला हूं जो शीशे से पत्थर को तोड़ता हूं...
  • राजनीति की भैंस के लिए दौलत की लाठी की ज़रूरत होती है...
  • बात जब अपनी मौत पर आती है न तो सारी खिड़कियां खुल जाती हैं...
  • कर भला तो हो भला...
  • नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या..
  • मैं जो आग लगाता हूं उसे बुझाना भी जानता हूं...
  • जिनके घर शीशे के होते हैं वो बत्ती बुझा कर कपड़े बदलते हैं...

 

बनना चाहते थे हीरो
कॉलेज पूरा करने के बाद प्रेम चोपड़ा ने ये निश्चय किया कि वे हिंदी फिल्म जगत में एक अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाएंगे लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बने लेकिन उन्होंने अपने पिता से भी कह दिया था कि वे सिर्फ अभिनेता बनना चाहते है। अपने सपने को साकार करने के लिये वह पचास के दशक के अंतिम वर्षों में मुंबई आ गये।

पहली फिल्म में ही हुए हिट
प्रेम चोपड़ा ने फिल्मों में आने के लिए बहुत संघर्ष किया था। मुंबई आने के बाद प्रेम चोपड़ा को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अपने जीवन यापन के लिये वह टाइम्स ऑफ इंडिया के सर्कुलेशन विभाग में काम करने लगे। इस दौरान फिल्मों में काम करने के लिये वह संघर्षरत रहे। इस बीच उन्हें एक पंजाबी फिल्म “चौधरी करनैल भसह” में काम करने का अवसर मिला। वर्ष 1960 में रिलीज हुई ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और प्रेम चोपड़ा अपनी एक नई पहचान बना पाने में सफल हुए।

“वो कौन थी” में बने विलेन
साल 1964 में रिलीज हुई फिल्म “वो कौन थी” प्रेम चोपड़ा के लिए काफी सफल फिल्म रही। राज खोंसला के निर्देशन में बनी इस फिल्म में प्रेम चोपड़ा ने खलनायक का किरदार निभाया था। ये फिल्म मनोज कुमार और साधना की मुख्य भूमिका वाली रहस्य और रोमांच से भरी फिल्म थी। इस फिल्म से प्रेम चोपड़ा को खलनायक के रूप में पहचान बनाने में कामयाबी मिली।

देशभक्ति का ज़ज्बा भी दिखा
वर्ष 1965 में प्रेम चोपड़ा की एक महत्वपूर्ण फिल्म “शहीद” प्रदर्शित हुई। देश भक्ति के जज्बे से परिपूर्ण इस फिल्म में उन्होंने अपने किरदार से दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद उन्हें “तीसरी मंजिल” और “मेरा साया” जैसी फिल्मों में अभिनय करने का मौका मिला। इन फिल्मों में उनके अभिनय के विविध रूप देखने को मिले।

वर्ष 1967 में प्रेम चोपड़ा को निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार की फिल्म “उपकार” में काम करने का अवसर मिला। जय जवान जय किसान के नारे पर बनी इस फिल्म में उन्होंने मनोज कुमार के भाई की भूमिका निभाई। उनकी यह भूमिका काफी हद तक ग्रे शेड्स लिये हुयी थी इसके बावजूद वह दर्शकों की सहानुभूति पाने में कामयाब रहे।

फिल्म “उपकार” की कामयाबी के बाद प्रेम चोपड़ा को कई अच्छी और बड़े बजट की फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये जिनमें “एराउंड द वर्ल्ड”, “झुक गया आसमान” , “डोली”, “दो रास्ते”, “पूरब और पश्चिम”, “प्रेम पुजारी”, “कटी पतंग”, “दो रास्ते”, “हरे रामा हरे कृष्णा”, “गोरा और काला” और “अपराध” जैसी फिल्में शामिल थी। इन फिल्मों में उन्हें देवानंद, राजकपूर, राजेश खन्ना और राजेन्द्र कुमार जैसे सितारों के साथ काम करने का अवसर मिला और वह सफलता की नयी बुलंदियों पर पहुंच गए।

“प्रेम नाम है मेरा..” ने बनाई दिलों में जगह
वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म “बॉबी” प्रेम चोपड़ा के सिने करियर के लिये मील का पत्थर साबित हुयी। बॉलीवुड के पहले शोमैन राजकपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वह एक मवाली गुंडे की एक छोटी सी भूमिका में दिखाई दिये। इस फिल्म में उनका बोला गया यह संवाद प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है।

अमिताभ के दोस्त बनकर मिला फिल्म फेयर
वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म “दो अनजाने” प्रेम चोपड़ा की एक और अहम फिल्म साबित हुयी। अमिताभ बच्चन और रेखा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में प्रेम चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के दोस्त की भूमिका निभाई थी। अपने दमदार अभिनय के लिये वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

वर्ष 1983 में प्रदर्शित फिल्म “सौतन” प्रेम चोपड़ा अभिनीत महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है। सावन कुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राजेश खन्ना, पद्मिनी कोल्हापुरी और टीना मुनीम ने मुख्य भूमिकाएं निभाई। इस फिल्म में उनका संवाद “मैं वो बला हूं जो शीशे से पत्थर को तोड़ता हूं” आज भी दर्शको की जुबान पर है।

प्रेम चोपड़ा के सिने सफर में उनकी जोड़ी मशहूर निर्माता निर्देशक देवानंद, मनोज कुमार, राजकपूर, मनमोहन देसाई और यश चोपड़ा के साथ काफी पसंद की गयी। प्रेम चोपड़ा ने अपने चार दशक लंबे सिने करियर में अब तक लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया है।


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