Sonam Kapoor to Play Batwoman

दि राइजिंग न्यूज़

एंटरटेनमेंट डेस्क। 

धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को लुधियाना के नसराली गांव में हुआ था लेकिन उनका बचपन साहनेवाल में बीता था। धर्मेंद्र के पिता किशन देओल हेड मास्टर थे और मां सतवंत कौर हाउस वाइफ थीं। धर्मेंद्र के कुल छह भाई बहन थे। धर्मेंद्र के पिता सख्त मिजाज के थे लेकिन इसके बावजूद धर्मेंद्र का मन पढ़ाई में कम और सिनेमा की रंगीनियों में ज्यादा लगता था और वो हीरो बनना चाहते थे। 

धर्मेद्र 15 साल की उम्र से ही चोरी-छिपे उस वक्त के मशहूर बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार की फिल्म देखने जाया करते थे और शायद यही वो वजह थी जब धर्मेंद्र शीशे के आगे दिलीप साहब की नकल किया करते थे और मुंबई जाने का सपना देखा करते थे। जब धर्मेंद्र का मन सिनेमा के अलावा और कहीं नहीं लगा तो उन्होंने अपनी मां को ये बात बताई तो मां ने उनसे अर्जी डालने को कहा। 

वो साल था 1954 जब धर्मेद्र के साथ वो हो गया जिसकी उन्हें शायद उम्मीद भी नहीं थी। दरअसल इसी साल धर्मेंद्र के माता-पिता ने उनकी 19 साल की उम्र में ही उनका विवाह प्रकाश कौर के साथ करा दिया था। घर परिवार की अब नई जिम्मेदारी ने धर्मेंद्र को एक अमेरिकन ड्रिलिंग कंपनी में नौकरी करने के लिए भी मजबूर कर दिया था। पर बॉलीवुड में एक बड़ा फेमस डॉयलाग है कि अगर आप किसी चीज को शिद्दत से चाहते हैं तो सारी कायनात उसे आपसे मिलाने कोशिश करती है।

ऐसा ही कुछ हुआ अभिनेता धर्मेंद्र के साथ जहां साल 1958 में फिल्म मैग्जीन फिल्म फेयर ने एक टेलैंट हंट कॉन्टेस्ट का आयोजन किया था। 23 साल के धर्मेंद्र भी इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने अपने गांव सोहनेवाल से मुंबई पहुंचे थे। बड़ी बात ये थी कि इस कॉन्टेस्ट में बिमल रॉय और गुरुदत्त जैसे दिग्गज फिल्मकारों ने प्रतियोगियों का चुनाव किया था। हीमैन जैसी काया और हीरो जैसी सूरत वाले धर्मेंद्र ये फिल्मफेयर कॉन्टेस्ट जीतने में कामयाब रहे थे। 

फिल्मफेयर न्यू टेलेंट अवॉर्ड जीतने के बाद धर्मेंद्र के लिए बॉलीवुड के दरवाजे भी खुल गए थे। धर्मेंद्र को फिल्मों में पहला ब्रेक उस वक्त मिला था जब मशहूर फिल्म निर्देशक बिमल रॉय ने अपनी फिल्म “बंदनी” के लिए उन्हें साइन किया था। इसके बाद जब धर्मेंद्र को उनका पहला चेक मिला तो वो उसे कैश ही नहीं कर पाए। क्योंकि उनका तो बैंक में खाता ही नहीं था। फिल्म तो मिल गई लेकिन फिल्म “बंदनी” की शूटिंग पूरी होने में करीब डेढ़ साल का लंबा वक्त लगा था और ये डेढ साल धर्मेंद्र पर किसी कयामत की तरह गुजरे थे।

ये वो वक्त था जब धर्मेंद्र को बॉलीवुड में कठिन दौर से गुजरना पड़ा था। उन दिनों वो एक स्टूडियों से दूसरे स्टूडियों के पैदल ही चक्कर लगाया करते थे और कभी–कभी रात को भूखे पेट ही सो जाते थे। 1960 से 68 के बीच के आठ सालों में धर्मेंद्र को ज्यादातर रोमांटिक फिल्मों में ही काम करने का मौका मिला था। कई ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों में भी उन्होंने छोटे-बड़े रोल किए। 1966 में मीना कुमारी के साथ आई उनकी फिल्म “फूल और पत्थर” सुपरहिट रही थी। धर्मेंद्र ने राजनीति में भी हाथ आजमाया। धर्मेंद्र बीकानेर से सांसद चुने गए लेकिन राजनीति का राह धर्मेंद्र को रास नहीं आई और उन्होंने राजनीति छोड़ दी।

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