Home Editorial Editorial On Gorakhpur And Phulpur By Polls Elections Results

छत्‍तीसगढ़: सुरक्षाबलों ने 9 नक्‍सलियों को गिरफ्तार किया

आसाराम केस: गृह मंत्रालय ने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा को जारी की एडवाइजरी

कास्‍टिंग काउच पर रणबीर कपूर ने कहा- मैंने कभी इसका सामना नहीं किया

कर्नाटक चुनाव: सिद्धारमैया ने किया नामांकन दाखिल

तेलंगाना: जीडीमेटला इलाके के गोदाम में लगी आग

छोटे चुनावों के बड़े नतीजे  

Editorial | 14-Mar-2018 17:55:57 | Posted by - Admin

 

  • भाजपा के अश्वमेध पर लगाम

   
15
संजय शुक्ल
(वरिष्‍ठ पत्रकार)

दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल 

 

प्रदेश से लेकर केंद्र की सरकार तक। देश के 75 फीसद राज्यों में शासन और उपचुनावों को लेकर प्रचार की कमान संभालने वाले भाजपा के तेज तर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताबड़तोड़ जनसभाएं। मगर नतीजा सामने आया तो जमीन ही खिसक गई। चुनाव के बाद से दोनों ही सीटों को जीतने की डींग भरने वाले भाजपा नेता का तमाम जोश दोपहर ढलते ढलते ठंडा पड़ गया। चुनाव परिणाम समीक्षा और मंथन की बातें होने लगीं। जी हां, बात  प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की है। एक सीट सीधे मुख्यमंत्री की थी तो दूसरी उप मुख्यमंत्री की। गोरखपुर सीट पर पिछले साढ़े तीन दशक से भाजपा का कब्जा था और विपरीत परिस्थितियों में भी भाजपा यहां जीतती रहीं लेकिन इस बार उसे हार का मुंह देखना पड़ा।

 

खास बात यह है कि उपचुनाव वाली दोनों ही लोकसभा सीटों पर पिछले लोकसभा चुनाव में सपा–बसपा को करीब 45 फीसद वोट मिले थे। जबकि भारतीय जनता पार्टी को करीब 39 फीसद मत प्राप्त हो गए थे। बसपा –सपा का समझौता होने के बाद मुकाबला 45 बनाम 39 का हो गया था। मगर मौजूदा हालात में भाजपा के पक्ष दिखाई दे रहे थे। उप चुनावों के नतीजों ने सारे ही समीकरणों को दरकिनार कर दिया।

दरअसल इन दोनों ही सीटों पर उपचुनाव को 2019 के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। दोनों सीटों पर सत्तारुढ़ भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर थी। कारण था कि एक सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से खाली हुई थी तो दूसरी उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की। इन दोनों कद्दावर नेताओं के अलावा करीब ढाई दशक बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सारे गिले शिकवे भुलाकर एक साथ भाजपा के विरोध में थे। हालांकि कांग्रेस इसमें नहीं शामिल थी मगर सपा–बसपा के समझौते को बेर–केर का संग, सांप नेवले की दोस्ती तथा चोर – चोर . .  की संज्ञा दी गई। चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा की हालत एक बार फिर एक दशक पुराने शाइनिंग इंडिया वाली हो गई। वहीं इस चुनाव से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी के लिए संजीवनी का काम किया। साथ ही 2019 में लोकसभा चुनाव का चुनावी गणित भी तय होता दिखाई दे रहा है। इन स्थितियों में अबतक बच रही कांग्रेस भी अब इसका अंग बनने को लालायित दिख रही है।

मायावती का दिखा असर

बहुजन समाज पार्टी के उपचुनाव में न उतरने तथा भाजपा को हराने वाले को काडर वोट दिए जाने की घोषणा को भी भारतीय जनता पार्टी बहुत हल्के में ले रहीं थी। हालांकि चुनाव नतीजे आने के बाद यह साफ हो गया कि बसपा सुप्रीमो मायावती का अपने काडर वोटों पर नियंत्रण बरकरार है और पिछड़े –दलित वोट बैंक पर उनकी पकड़ कहीं कम नहीं हुई है। वहीं भाजपा के कद्दावर नेताओं वाली सीटों पर पटखनी देने के बाद समाजवादी पार्टी भी इसके लिए बसपा का शुक्रिया अदा करने में कतई नहीं हिचकी। नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी तो जीत पक्की होते ही बसपा सुप्रीमो से मिलने पहुंचे और साधुवाद दिया। इस गर्मजोशी ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों की जमीन को भी मजबूती देना शुरू कर दिया है। सपा –बसपा के इस गठबंधन की जीत से भाजपा भी हतप्रभ है।    

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555



Loading...





TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll

Merchants-Views-on-Yogi-Government-One-Year-Completion

Loading...




Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news




sex education news

खबरें आपके काम की