Home Editorial Case Of School Negligence In Country

BJP और खुद PM भी राहुल गांधी का मुकाबला करने में असमर्थ: गुलाम नबी आजाद

जायरा वसीम छेड़छाड़ केस: आरोपी 13 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में

J-K: शोपियां में केश वैन पर आतंकी हमला, 2 सुरक्षाकर्मी घायल

महाराष्ट्र: ठाने के भीम नगर इलाके में सिलेंडर फटने से लगी आग

गुजरात: दूसरे चरण के चुनाव के लिए प्रचार का कल आखिरी दिन

स्कूल...स्‍वर्ग या नर्क? 

Editorial | 21-Sep-2017 05:28:24 PM | Posted by - Admin

   
8

(गुमनाम)

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

अभी तक तो यही लगता था कि स्‍कूल धरती का स्‍वर्ग है, लेकिन ऐसा है नहीं शायद।

आठ सितंबर तक अभिभावक इस बात से निश्चिंत थे कि स्‍कूल प्रशासन उनके बच्‍चे की देखरेख कर रहा है और उनके आने वाले कल को एक नई दिशा दे रहा है, लेकिन प्रद्युम्‍न हत्‍याकांड के बाद सभी का समीकरण बदल गया।

 

यह वो दिन था जब दिल्ली से सटे गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में एक सात साल के छात्र प्रद्युम्‍न ठाकुर की हत्या कर दी गई, और उसका शव स्‍कूल के ही टॉयलेट में मिला। इस घटना के बाद राजस्थान के सीकर में एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार की घटना से भी यह बड़ा सवाल पैदा हुआ है कि अब स्कूल कितने सुरक्षित हैं।

 

 

सीकर के हरदासकाबास गांव के एक निजी स्कूल में बारहवीं कक्षा की छात्रा के साथ बलात्कार करने में स्कूल का निदेशक और एक शिक्षक शामिल था। अतिरिक्त कक्षा के बहाने स्कूल में बुलाकर दोनों ने छात्रा से बलात्कार किया। यही नहीं उसे धमकी देकर आरोपी दो महीने तक उसका शोषण करते रहे और उसके गर्भवती हो जाने के बाद जब छात्रा का जबरन गर्भपात कराया गया तो उसकी तबियत खराब होने पर मामला सामने आया।

 

 

शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आखिर अपराधी प्रवृत्ति के ऐसे लोग किन वजहों से ऐसी हिम्मत कर पाते हैं कि स्कूल परिसर में भी बच्चों के खिलाफ अपराध करने से नहीं डरते। क्या ये स्कूल सरकार और पुलिस प्रशासन की निगरानी और सख्ती के दायरे में नहीं आते?

 

 

ताजा मामला 20 सितंबर का है जब हरियाणा के पानीपत के एक स्कूल में नौ साल की बच्ची से छेड़छाड़ और रेप की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि यहां के “द मिलेनियम” स्कूल में स्वीपर ने ही वारदात को अंजाम दिया। आरोप है कि स्कूल मैनेजमेंट ने 13 घंटे तक मामले को दबाए रहा। बुधवार रात 8:45 बजे बच्ची का परिवार महिला थाने पहुंचा। पुलिस ने अज्ञात शख्स और स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच के लिए पुलिस देर रात स्कूल पहुंची थी।

यह तो उदाहरण मात्र हैं ऐसे कई मामले हैं जिनकी भनक भी स्‍कूल परिसर के बाहर तक नहीं पहुंच पाती है और स्‍कूल प्रबंधन ऐसे घृणाकृत्‍य काम करते हैं।

 

 

इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जिन स्कूलों में वहां के प्रबंधन और शिक्षकों के भरोसे लोग अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, वही लोग उन्हें अपनी हवस और आपराधिक कुंठाओं का शिकार बनाते हैं। आमतौर पर डॉक्टरों के पास हादसे का शिकार होकर कोई व्यक्ति आपात सहायता के लिए पहुंचता है, वे इलाज से पहले पुलिस बुलाने को कहते हैं, लेकिन इस मामले में सामूहिक बलात्कार की शिकार छात्रा को जबरन गर्भपात के लिए जिस डॉक्टर के पास ले जाया गया, उसने पैसे के लालच में पुलिस को खबर तक करना जरूरी नहीं समझा।

 

 

इसलिए छात्रा के खिलाफ इस अपराध में पुलिस ने उचित ही संबंधित अस्पताल के दो डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। करीब सात महीने पहले सीकर की तरह ही बीकानेर में नोखा के एक निजी स्कूल में ऐसी ही घटना सामने आई थी, जिसमें आठ शिक्षकों ने तेरह साल की एक छात्रा का अश्लील वीडियो बना कर उसे ब्लैकमेल किया और डेढ़ साल तक सामूहिक बलात्कार किया था। इसके अलावा, बच्चों के यौन शोषण से लेकर मारपीट या हत्या तक की घटनाओं की खबरें आती रहती हैं।

 

 

ऐसी घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि लोग जिन स्कूलों में अपने बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए भेजते हैं, वे शायद पूरी तरह निश्चिंत होकर भरोसा किए जाने लायक नहीं हैं। जरूरत इस बात की है कि स्कूल में जाने वाले बच्चों से उनके अभिभावक लगातार संवाद में रहें, उन्हें भरोसे में लेकर उनकी दिनचर्या और उनके अच्छे-बुरे अनुभवों पर बात करें। निजता से जुड़े कुछ मामलों के प्रति सामाजिक आग्रहों और नजरिए की वजह से बच्चे कई बार अपने साथ होने वाले आपराधिक दुर्व्यवहार के बारे में अपने अभिभावकों को भी कुछ बताने से डरते या हिचकते हैं।

 

 

बच्चों से होने वाले दुर्व्यवहार या उनके खिलाफ अपराधों की पूरी प्रवृत्ति इस जरूरत को रेखांकित करती है कि बच्चों को शुरू से इस बात के लिए घर में ही ऐसे प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे अपने साथ किसी भी बर्ताव की पहचान कर सकें और वक्त पर अपने अभिभावकों को बता सकें। इसके अलावा, अगर लोग एक भरोसे के तहत अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं तो उनकी हर तरह से सुरक्षित माहौल में पढ़ाई-लिखाई तय करना सरकार की भी जिम्मेदारी है।

सरकार और प्रशासन की निगरानी, सख्ती और सजगता स्कूल प्रबंधनों को इस बात के लिए जवाबदेह बनाएगा कि वे परिसर को सुरक्षित बनाएं, क्‍योंकि यही बच्‍चे बड़े होकर देश का भविष्‍य संवारेंगे।

 

 

वैसे भी बच्‍चों की सुरक्षा स्‍कूल प्रबंधन की जिम्‍मेदारी होने के साथ-साथ सरकार और प्रशासन की भी बड़ी जिम्‍मेदारी है, जिसे उसे निभाना चाहिए। प्रदेश-देश में चल रहे स्‍कूलों को सरकार और प्रशासन अपनी सख्‍ती से इस बात के लिए जवाबदेह बनाए कि बच्‍चों की सुरक्षा के लिए स्‍कूल परिसर में क्‍या व्‍यवस्‍थाएं हैं और स्‍कूल प्रबंधन कैसे इनको लागू कर रहा है।

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555








TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll





Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news




sex education news