Shahid Kapoor Reaction on Priyanka Chopra and Nick Engagement

दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर पिछले 55 घंटे का सियासी नाटक शनिवार शाम करीब पांच बजे समाप्त हो गया। राज्यपाल से आमंत्रण मिलने के बाद सरकार बनाने की दम भर रही भाजपा बहुमत का आंकड़ा जुटाने में नाकामयाब रही। मगर कहा जाता है कि सिसायत में हार-जीत दोनों के मायने होते हैं। लिहाजा भाजपा के मुख्यमंत्री येदुरप्पा ने इस्तीफा देने से पहले एक बार फिर भाषण के जरिए कर्नाटक के लोगों की सहानुभूति अर्जित करने का प्रयास किया। सियासी लहजे में देखें तो शाह-मोदी की भाजपा का यह “अटल” दांव था। लोगों की सहानुभूति हासिल करने के लिए लोक कल्याण की दलीलें दी गईं और उसके बाद राज्यपाल को जाकर इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि राजनीति के जानकार पहले ही इसके कयास लगा रहे थे लेकिन इस करारी शिकस्त के जरिए भी भाजपा ने लोगों की सहानभूति हासिल करने का पूरा प्रयास किया।

आपको याद होगा करीब 22 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक मत से गिर गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी सदन में अपने संबोधन में देश की स्थिति, कांग्रेस की स्थिति और तमाम दिक्कतों को भाषण में आधार बनाते हुए भावुक भाषण दिया। कर्नाटक विधान सौदा (विधानसभा) में शनिवार शाम को कुछ वैसा ही देखने को मिला। येदुरप्पा ने काफी भावुक अंदाज में अपना भाषण दिया। किसान नेता के रूप की छवि वाले येदुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। उनका मकसद किसानों की तरक्की और विकास था लेकिन वह बहुमत हासिल नहीं कर सकें। उधर, येदुरप्पा के भाषण के बाद ही भाजपा के तमाम नेताओं के सुर भी एकदम से बदल गए। कर्नाटक में जोड़तोड़ में नाकामी को शहादत और लोकतंत्र की रक्षा का जामा पहनाया जाने लगा। वैसे गुजरे 55 घंटे में जो कुछ हुआ, वह छिपा भी नहीं है लेकिन इसके बावजूद भाजपा प्रदेश में जनविरोधी सरकार बनने का मलाल ही जताती दिखी। हालांकि येदुरप्पा के भावुकता भरे भाषण और उसके बाद बहुमत न होने के इस्तीफे के जरिए अब भाजपा अब छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसे भुनाने की तैयारी में जुट गई है।

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