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विनिवेश के रास्ते से सरकार करती है एलआइसी के पैसे का उपयोग

Finance | 24-May-2016 03:59:37 PM
     
  
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दि राइजिंग न्‍यूज

24 मई।

-होने वाला है एनएमडीसी का विनिवेश


केंद्र सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिये विनिवेश का सहारा लेती है। इसके अंतर्गत लाभ में चल रहे सरकारी उपक्रमों का कुछ हिस्सा विनिवेश के माध्यम से पब्लिक ऑफर के जरिये स्टाक मार्केट में बेचा जाता है। सरकारी कंपनियां के बेचे गए हिस्से से मिलने वाली रकम को ही केंद्र सरकार विनिवेश के माध्यम से प्राप्त आय में शामिल कर लेते हैं। मालूम हो की भारत के सभी सरकारी उपक्रमों की हिस्सेदारी राष्‍ट्रपति के नाम से होती है लेकिन विनिवेश के बाद यही हिस्सेदारी बदलकर अन्य संस्थाओं के पास चली जाती है। इन आर्थिक संस्थाओं का धन विनिवेश के माध्यम से सरकार के पास आ जाता है। यह संस्था या तो सरकारी बैंक होती है या फिर एलआइसी। कुछ परिस्थितियों में विदेशी निवेशक भी सरकारी विनिवेश में रुचि लेते हैं लेकिन ऐसा सिर्फ लाभ देनेवाले उपक्रम के विनिवेश में ही होता है। केंद्र सरकार के अधिकतम विनिवेश में मुख्य भुमिका एलआइसी अदा करती है और इसी माध्यम से सरकार विनिवेश के बहाने से एलआइसी के पैसे का उपयोग करती है। आंकड़ों के अनुसार बीते फरवरी माह में सरकारी कम्पनी एनटीपीसी का विनिवेश हुआ और इसके अंतर्गत केंद्र सरकार ने पांच प्रतिशत के हिस्से को विनिवेश के माध्यम से बेचा। पहले एनटीपीसी में केंद्र सरकार का हिस्सा जोकि साल 2015 के अंतिम वित्तिय माह में 74.96 प्रतिशत का था वह साल 2016 के अंतिम वितीय माह में कम होकर 69.96 प्रतिशत तक रह गया। इसी दौरान साल 2015 के अंत में एलआइसी का हिस्सा जो की 9.92 प्रतिशत का था बढ़कर 12.98 प्रतिशत तक हो गया और इस 3.06 प्रतिशत हिस्सा बढ़ाने के लिये एलआइसी ने केंद्र सरकार को 3541 करोड रुपये दिये हैं।

इसके पूर्व में साल 2012 में सरकार ने एनएमडीसी का विनिवेश किया था जिसके अंतर्गत एलआइसी ने विनिवेश में हिस्सा लेते हुए 273 करोड़ की रकम को सरकार को दे दिया और इसके बदले एलआइसी की एनएमडीसी में हिस्सेदारी बड़ गई। आने वाली 27 तारिख को एनएमडीसी के 12.5 प्रतिशत तक के हिस्से का केंद्र सरकार विनिवेश करने जा रही है और ऐसा लगता है की अब एक बार फिर से एलआइसी का धन सरकार के खाते मे जाने वाला है।

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने साल 2010 में शिपिंग कार्पोरेशन आफ इंडिया का भी विनिवेश किया था और और इसके माध्यम से सरकार का शिपिंग कार्पोरेशन में हिस्सा 80.12 प्रतिशत से  कम होकर 63.75 पर आ गया। एलआइसी का हिस्सा 2.87 प्रतिशत बढ़ गया और भारतीय स्टेट बैंक का ने भी सरकार के विनिवेश में मदद करते हुए 1.11 प्रतिशत हिस्सा खरीद लिया था। 



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