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दि राइजिंग न्‍यूज

हैदराबाद।

 

मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट केस के पांच आरोपियों को बरी करने वाले एनआइए के स्पेशल जज के रविंदर रेड्डी ने अपना फैसला सुनाने के बाद ही निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर एक टिप्पणी की थी। उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) द्वारा कोर्ट में दिए तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि आरएसएस से जुड़ाव का यह मतलब नहीं है कि वह शख्स सांप्रदायिक या फिर समाज विरोधी है। उन्होंने सीबीआइ को भी विश्वसनीय नहीं माना था।

आरएसएस गैरकानूनी रूप से काम करनेवाला संगठन नहीं

जज ने एनआइए द्वारा लगाए गए आरोपों पर बहस के दौरान सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या अभियोजन पक्ष अपने संदेह से परे यह साबित कर सकता है कि देवेंदर गुप्ता सांप्रदायिक है, क्योंकि वह आरएसएस के प्रचारक हैं? आरएसएस कोई गैरकानूनी रूप से काम करनेवाला संगठन नहीं है। यदि कोई शख्स इसमें काम करता है तो इससे यह साबित नहीं होता कि वह सांप्रदायिक है। यह टिप्पणी जज ने अपने 140 पेजों के दिए फैसले में की थीं। अपने फैसले में रविंदर रेड्डी ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस को 18 पॉइंट्स में सीमित कर दिया था।

बता दें कि मक्का मस्जिद केस में मुख्य आरोपी असीमानंद समेत सभी आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया था। फैसला सुनाने के बाद जज रविंदर रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस धमाके में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे। मामले में 10 आरोपियों में से आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें नबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल था। वहीं, जज के इस्तीफे को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाई कोर्ट ने अस्वीकार करते हुए उन्हें तुरंत काम पर लौटने का आदेश दिया है।

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