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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

अमरनाथ यात्रा के दौरान भक्त भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए जाते हैं। साथ ही कई जगहों पर घंटियां भी बजाते हैं। हालांकि अब भक्त जहां अमरनाथ की सीढ़ियां शुरू होती हैं, वहां पर जयकारा और घंटियां नहीं बजा सकेंगे। ऐसा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश की वजह से हो रहा है। लैंड स्लाइड (पत्थर गिरने) की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। यही नहीं आदेश में यात्रियों के मोबाइल फोन पर भी बैन लगाने की बात कही गई है।

 

एनजीटी ने अमरनाथ को साइलेंस जोन घोषित करने का आदेश दिया। वहीं एनजीटी ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि कुछ मंदिरों मे बात करने की मनाही है और वहां पर साइलेंस जोन है, जैसे बहाई मंदिर, तिरुपति और अक्षरधाम में। वहीं अमरनाथ में ध्वनि के कारण लैंडस्लाइड का ख़तरा बढ़ जाता है। ऐसे में एनजीटी के अनुसार पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील होने और इलाके में ग्लेशियरों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यहां शोर-शराबा नहीं होना चाहिए और यात्रियों की संख्या भी सीमित होनी चाहिए।

एनजीटी में याचिका देने वाले वकील आदित्य सिंघला ने आजतक को बताया कि एनजीटी ने यह आदेश वहां के इकोलॉजिकल स्ट्रक्चर को देखते हुए दिए हैं, जिससे लैंड स्लाइडिंग की घटनाएं न बढ़े। जब एक साथ सैंकड़ों लोग घंटिया बजाते है या फिर जयकारे लगाते है तो वहां के पर्यावरण को नुकसान होता है।

 

आपको बता दें कि पिछले महीने एनजीटी ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड को श्रद्धालुओं को पर्याप्त बुनियादी ढांचा उपलब्ध न कराने और इस मामले में दिसंबर के पहले हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट न सौंपने को लेकर फटकार लगाई थी। अमरनाथ श्राइन बोर्ड को फटकार लगाने के बाद ही एनजीटी की ओर से ये आदेश जारी किया गया है ।एनजीटी ने आदेश में कहा कि श्राइन बोर्ड को यह तय करना चाहिए कि लोग आखिरी चेक पोस्ट से अमरनाथ गुफा तक एक ही लाइन में जाएं। एनजीटी ने कहा कि श्राइन बोर्ड इस बात की व्यवस्था करे कि यात्री अपना सामान सुरक्षित रूप से रख सके।

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