Baaghi 2 Assistant Director Name Came in Physical Assault

दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ।

 

आप लोगों ने एग्जाम पेपर आउट होने की घटनाएं जरूर सुनी होगीं लेकिन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में एक विरला मामला सामने आया है। यहां होने वाली नियुक्तियां पहले से ही सार्वजानिक कर दी गईं हैं। दरअसल, विवि के कुलपति विनय कुमार पाठक के कार्यकाल में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार संभव है। खुलेआम आरोप लगाया गया है कि विनय पाठक ने सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में निदेशक के पद तक बेच डाले हैं। निदेशक की नियुक्तियों के लिए इसी सप्ताह इंटरव्यू हुए हैं लेकिन नियुक्त होने वाले लोगों के नाम महीनों पहले से सभी की जुबान पर हैं। नियुक्ति का रिजल्ट आने के बाद इन आरोपों पर विराम लगने की बजाय आरोप सच साबित होते ज्यादा दिख रहे हैं।

 

प्रदेश के सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में चहेतों को बतौर शिक्षक नियुक्त करने का आरोप खत्म नहीं हुआ था कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति विनय कुमार पाठक पर नया सनसनीखेज आरोप लग गया है।

 

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प्रमुख दावेदारों में चार नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। हालांकि अब यह बताया जा रहा है कि नाम पहले से खुल जाने के कारण दो नाम हटा दिए गए और बाकी दो का चयन लगभग तय है।इसमें खेल यह है कि हटाए गएनामों को अगली नियुक्तियों के लिए रोक दिया गया है, जो तय हैं। इस खेल में करोड़ों रुपयों का हेर-फेर किए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप इसलिए भी मजबूत हो रहा है कि निदेशक के चयन का जिम्मा भी कुलपति के करीबी आइआइटी कानपुर के पूर्व निदेशक संजय गोविंद धांडे के जिम्मे रखा गया था।

 

 

जानते हैं पूरा मामला

सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि बीते बुधवार को राजकीय इंजी. कॉलेजों के डायरेक्टर्स के इंटरव्यू AKTU में हुए। कुलपति विनय पाठक ने इसमें खासा दिलचस्‍पी दिखाई।

इस नियुक्ति में विनय पाठक अपने चहेतों के लिए जद्दोजहद करते रहे-

  • Prof S P SHUKLA (civil engg department , IET LUCKNOW

  • Prof Manish Gaud (Comp. Sci department IET lucknow)

  • Prof Vipin tripathi (Comp. Sci department HBTU)

  • Prof. Virendra Pathak (fashion tech college Noida)

कुछ ऐसा है समीकरण

 

बीते दिसंबर को जिन अभ्यर्थियों ने कुलपति के भ्रष्टाचार के खिलाफ शहर के लक्ष्मण मेला मैदान में आवाज उठाई थी, उन अभ्यर्थियों ने इन लोगों का नाम उजागर करते हुए पहले से ही आशंका जताई थी की इनकी नियुक्तियां होगीं। उन्होंने बाकायदा इन लोगों के नाम के साथ ये बताया था कि ये कुलपति के ख़ास है और विनय पाठक इनकी नियुक्तियों के लिए जद्दोजेहद कर रहे हैं।

 

सूत्रों की मानें तो प्रो.एसपी शुक्ला (civil engg department , IET LUCKNOW) और प्रो.विपिन त्रिपाठी (Comp. Sci department HBTU) का नाम नियुक्तियों पर कन्फर्म है।अपने चारों चहेतों को कुल‍पति एकेटीयू में लाना चाह रहे हैं।

 

 

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नए खेल के रेफरी बनने की तैयारी में कुलपति

अभी हाल ही में विवि से सम्बद्ध (एफिलिएटेड) कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। इस खेल में कुलपति जी ने 7000 आवेदकों के साथ भद्दा मजाक किया। इन पदों पर हुईं धांधलेबाजी भी सबके सामने उजागर हुईं हैं।आवेदकों के पैसे तो डूबे ही साथ ही उनकी शिक्षक बनने की उम्मीद भी टूट चुकी है। एक एक करके सभी अभ्यर्थी कोर्ट की शरण में पहुंच रहे हैं।

 

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति विनय कुमार पाठक विवि की साख परबट्टा लगाने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विवि की बागडोर भी वह ऐसे हाथों में सौंप चुके हैं जिनके अनुभव भी फर्जी हैं।  इससे विवि की गरिमा मिट्टी में मिल रही है साथ ही छात्रों का भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है। अब विनय पाठक इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के लिए ऐढ़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं।

 

 

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लिखित परीक्षा का खेल

अभी हाल ही में एकेटीयू कुलपति विनय कुमार पाठक पर आरोप लगा है कि इन्होंने 7000 अभ्यर्थियों की जिंदगी मजाक बना दी। दरअसल, विवि से एफिलिएटेड कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर नियुक्तियां निकलीं। कुलपति जी ने इस पर धांधलियां कर डाली और हेरफेर कर पदों पर अपने आदमियों को बैठा दिया, आवेदकों का आक्रोश फूटा और उन्होंने इस मुद्दे पर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। यह पहला मौका नहीं है जब पारदर्शिता दिखाने के लिए लिखित परीक्षा कराई गई हो और बाद में आरोप न लगे हों। कोटा में भी इसी साजिश के तहत ही  लिखित परीक्षा के माध्यम से ही अपनों की नियुक्ति का खेल बखूबी अंजाम दिया जा चुका है। इसकी शिकायत भी बड़े स्तर पर की गई है।

श्रेय लेने में माहिर हैं कुलपति

कुलपति विनय पाठक श्रेय लेने और वाहवाही लूटने में सबसे आगे हैं। एकेटीयू की नवनिर्मित बिल्डिंग का काम पूर्व कुलपति प्रो. कृपाशंकर के कार्यकाल में 85 फीसद तक पूरा हो चुका था। विनय पाठक के कार्यकाल में सिर्फ इसे पूरा किया गया है लेकिन कुलपति श्रेय लेने से नहीं चूकते कि बिल्डिंग का कार्य उन्होंने कराया है। यही नहीं कर्मचारियों के विनियमितीकरण की प्रक्रिया भी पूर्व कुलपति डॉ.आरके खांडल के प्रयासों से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पत्र से हुई थी, इसमें भी पाठक अपनी ही पीठ थपथपाते हैं।

"मेरे पास इससे संबंधित कोई जानकारी नहीं है। आप कुलपति से इस विषय में बात करिए।"

आशीष मिश्र

जनसंपर्क अधिकारी एकेटीयू 

 

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