Ayushman Khurrana Wants To Work in Kishore Kumar Biopic

दि राइजिंग न्यूज़

एंटरटेनमेंट डेस्क।

सुंदर चेहरा, दमदार एक्टिंग, आकर्षक पर्सनैलिटी और दिलकश अंदाज से बॉलीवुड में खुद को रोमांटिक हीरो के तौर पर स्थापित करने वाले शशि कपूर का आज 80वां जन्मदिन है। शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कलकत्ता में हुआ था। ये ऐसा पहला मौका होगा जब जन्मदिन के मौके पर वो हमारे बीच नहीं होंगे। दरअसल पिछले साल 4 दिसंबर 2017 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में लिवर फेल होने की वजह से उनकी मौत हो गई थी।

70 के दशक में जब एंटी हीरो और एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन का दबदबा था तब शशि कपूर ने अपनी खास मुस्कान के दम पर खुद को हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में खुद को स्थापित किया बल्कि सुपरस्टार अमिताभ को चुनौती भी दी।

आइए जानते हैं उन्हीं से जुड़ीं कुछ खास बातें-

  • हिंदी सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले पृथ्वीराज कपूर के घर 18 मार्च, 1938 को जन्मे शशि कपूर पृथ्वीराज के चार बच्चों में सबसे छोटे हैं। उनकी मां का नाम रामशरणी कपूर था।
  • आकर्षक व्यक्तित्व वाले शशि कपूर के बचपन का नाम बलबीर राज कपूर था। बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे। उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता के “पृथ्वी थियेटर्स” में मिला।
  • शशि ने एक्टिंग में अपना करियर 1944 में अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर के नाटक “शकुंतला” से शुरू किया। उन्होंने फिल्मों में भी अपने एक्टिंग की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी।
  • शादी के मामले में भी वह अलग ही निकले। पृथ्वी थिएटर में काम करने के दौरान वह भारत यात्रा पर आए गोदफ्रे कैंडल के थिएटर ग्रुप “शेक्सपियेराना” में शामिल हो गए। थियेटर ग्रुप के साथ काम करते हुए उन्होंने दुनियाभर की यात्राएं कीं और गोदफ्रे की बेटी जेनिफर के साथ कई नाटकों में काम किया। इसी बीच उनका और जेनिफर का प्यार परवान चढ़ा और 20 साल की उम्र में ही उन्होंने खुद से तीन साल बड़ी जेनिफर से शादी कर ली। कपूर खानदान में इस तरह की यह पहली शादी थी।
  • श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, गोविंद निहलानी, गिरीश कर्नाड जैसे देश के दिग्गज फिल्मकारों के निर्देशन में जूनून, कलयुग, 36 चौरंगी लेन, उत्सव जैसी फिल्में बनाईं। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तो सफल नहीं हुईं, लेकिन इन्हें आलोचकों ने काफी सराहा और ये फिल्में आज भी मील का पत्थर मानी जाती हैं।
  • शशि कपूर भारत के पहले ऐसे एक्टर्स में से एक हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में भी काम किया। इनमें हाउसहोल्डर, शेक्सपियर वाला, बॉम्बे टॉकीज, तथा हीट एंड डस्ट जैसी फिल्मे शामिल हैं।
  • हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
  • अपनी फिल्म “जुनून” के लिए उन्हें बतौर निर्माता राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, “न्यू डेल्ही टाइम्स” में एक्टिंग के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 2011 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान मिला।
  • इसके अलावा शशि कपूर को फिल्म “जब जब फूल खिले” के लिए बेस्ट एक्टर, बांबे जर्नलिस्ट एशोसिएशन अवॉर्ड और फिल्म “मुहाफिज” के लिए स्पेशल ज्यूरी का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।

शशि कपूर के बारे में कुछ अनसुनी बातें

एक समय में वो फिल्‍मों में इतना बिजी थे कि अपने भाई राज कपूर को फिल्‍म के लिए डेट्स नहीं दे पाए थे। बात है फिल्‍म सत्यम शिवम सुंदरम की। राज कपूर की इस फिल्‍म के लिए शशि उन्‍हें डेट्स नहीं दे पा रहे थे। इससे राज नाराज हो गए।

एक बार शशि कपूर मरते-मरते बचे थे। दरअसल, हुआ कुछ यूं था कि साल 1979 में मनमोहन देसाई की फिल्म सुहाग आई। इस फिल्म के क्लाइमैक्स सीन की शूटिंग हो रही थी कि और एक एक्शन सीन शूट होना था। इसमें अमजद खान हैलीकॉप्टर से भागने की कोशिश कर रहे थे और शशि-अमिताभ को उन्हें रोकना था। इस सीन के लिए दोनों एक्टर्स को हैलीकॉप्टर पर लटकना था। इस सीन में करीब 100 फीट की ऊंचाई पर जब ये सीन शूट हो रहा था तब शशि के हाथ फिसलने लगे। शशि काफी डर गए थे और उन्हें लगा अब वो नहीं बच पाएंगे, लेकिन फिर तभी हैलीकॉप्टर थोड़ा नीचे आने लगा और शशि की थोड़ी हिम्मत बढ़ी और उन्होंने जैसे-तैसे टाइट हैलीकॉप्टर पकड़ा।

जब शशि सीन शूट करके वापस आए तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। जिसके बाद शशि ने कहा, मुझे लगा कि आज मैं जिंदा नहीं बचूंगा। बस फिर क्या था, शशि ने उस दिन कसम खाई कि अब वो कभी स्टंट नहीं करेंगे।

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