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दि राइजिंग न्‍यूज

देहरादून।

 

एमसीआइ 21 साल बाद देश भर में एमबीबीएस का पाठ्यक्रम बदलने जा रहा है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने नया सिलेबस तैयार कर लिया है। वर्ष-2019 से छात्र-छात्राओं को इसे पढ़ाया जाएगा।

एमसीआइ की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अब वक्त आ गया है कि लगातार बढ़ रहे मर्जों, इलाज की आधुनिक तकनीकों के साथ ही चिकित्सक और मरीज के बीच बेहतर संचार हो। वर्ष-2019 के बाद जो भी डॉक्टर बनेंगे, उनका एक अलग दृष्टिकोण होगा। उनके भीतर पहले के मुकाबले ज्यादा नैतिकता होगी। उनका मरीज के साथ बातचीत का तरीका बेहतर होगा। एमसीआइ ने इसे भी सिलेबस में जोड़ लिया है। अगले वर्ष से छात्रों को इसे सिलेबस में पढ़ाया जाएगा।

यह भी होगा फायदा

  • छात्रों को द्वितीय वर्ष नहीं, बल्कि प्रथम वर्ष से ही अस्पताल में काम करने का मौका मिलेगा।

  • चिकित्सकों को कहीं भी इलाज के दौरान भाषा की अड़चन न आए, इसके लिए विशेष फाउंडेशन कोर्स कराया जाएगा।

  • पहली बार एमबीबीएस में वैकल्पिक विषय की शुरुआत होने जा रही है। छात्र अपनी पसंद के हिसाब से विषय चुन सकते हैं।

  • सीखने के उद्देश्य से छात्रों के लिए दो मॉडल लांच किए जाएंगे।

  • नया पाठ्यक्रम, सीखने पर केंद्रित होने के साथ-साथ ही रोगी केंद्रित, लिंग संवेदनशील, परिणाम उन्मुख और पर्यावरण के लिए उपायुक्त होगा।

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