उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी में खुलते है
उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी में खुलते है

द राइजिंग न्यूज़ , लखनऊ : हिंदू धर्म में विशेष कर उत्तर भारत में नाग पंचमी के दिन नाग और सर्पों की पूजा की जाती है। नाग पंचमी का त्योहार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग के मान का मर्दन करते हुए उसे यमुना नदी छोड़ कर समुद्र में जाने पर मजबूर कर दिया था। उसी दिन से नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। नाम पंचमी का त्योहार इस साल 13 अगस्त को पड़ रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल नाग पंचमी पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। जो कि नाग देवता का आशीर्वाद पाने और काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष तौर पर लाभप्रद है....

नाग पंचमी पर विशेष संयोग –

इस साल नाग पंचमी 13 अगस्त दिन शुक्रवार को पड़ रही है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार नाग पंचमी पर उत्तरा योग और हस्त नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। साथ ही काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए विशिष्ट फलदायी शिन नक्षत्र भी लग रहा है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में काल सर्प दोष मुक्ति की पूजा करना सबसे अधिक प्रभावशाली रहता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नाग पंचमी पर ऐसा संयोग 108 साल बाद बन रहा है। इस बार नाग पंचमी पर नाग देव की पूजा विशेष रूप से फलदायी है।


कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय –

जिन व्यक्तियों की कुण्ड़ली में काल सर्प दोष होता है उन्हें नाग पंचमी की पर नाग देवता की पूजा जरूर करनी चाहिए। काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए प्रयागराज संगम के पास नाग वासुकी तीर्थ, तक्षक तीर्थ या फिर उज्जैन के नाग चंदेश्वर मंदिर में विशेष रूप से पूजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त जानकार ज्योतिषाचार्य या पंड़ित के अनुसार शास्त्र विहित तरीके से काल सर्प दोष का पूजन करें। इस साल नाग पंचमी का ये संयोग इस पूजन के लिए सर्वाधिक लाभ प्रद है।

Latest News

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

हमारे टेलीग्राम चैनल को तुरंत सब्सक्राइब  Subscribe