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प्रधानमंत्री मोदी... महिला और सोशल मीडिया

  • एक खबर जो बनी लेख फिर हो गई वायरल
  • महिलाओं को सीट देकर ट्रेन की फर्श पर सोए थे मोदी



 
दि राइजिंग न्‍यूज

03 जनवरीलखनऊ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (02 जनवरीको लखनऊ में परिवर्तन महारैली को संबोधित करने आए। रमाबाई अंबेडकर मैदान में उमड़ी भीड़ को देखकर गदगद पीएम ने कहा अरे इससे इतनी बड़ी रैली कभी संबोधित नहीं की। यह उनकी सहद्रयता थी। जो उनके मनोभावों में अंदर बचपन से रची बसी है। पीएम यूपी की राजधानी में जब भी आए कुछ अलग ही कर डाला। पिछले दशहरे पर राम की शक्तिपूजा में शामिल हुए। उसके पहले डॉक्‍टर अंबेडकर के पवित्र कलश को देखने आए। पीएम 2016 से 2017 के आरंभ तक उत्‍तर प्रदेश के अंदर 17 बार आए लेकिन पिछले एक महीनों में पीएम ने आठ बार यूपी की धरती को थामा।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने सात बार महिलाओं की आजादी का मुद्दा उठाया। बेटी बचाओं से लेकर बेटी पढ़ाओ तकतलाक से वनवास तक का जिक्र पीएम ने किया। दो दिन पहले ही गर्भवती महिलाओं के लिए 6000 रुपये की व्‍यवस्‍था की। उसके पहले बलिया से गरीब महिलाओं के लिए गैस चूल्‍हा बांटने की योजना दी। यानी प्रधानमंत्री अपनी गरिमा के साथ हमेशा ही महिलाओं की आजादी के समर्थक रहे हैं।

ऐसे में हम आपको वह घटना बता रहे हैं जिसने़ 1990 के दशक में लखनऊ से अपनी यात्रा आरंभ की और गुजरात जाते जाते वह घटना उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले असम से लेकर गुजरात तक छपी। लेकिन तब वह केवल अखबारों के पन्‍नों और कतरनों में सिमट गई थी पर उस शख्‍स के पीएम बनने के बाद वह घटना महिलाओं के प्रति सम्‍मान रखने का ऐतिहासिक दस्‍तावेज बन गई।

आज पीएम यह कहते ही है कि उत्‍तर प्रदेश में ”विकास का वनवास” चल रहा है। जब वे  कह रहे थे कि बीजेपी का 14 साल का वनवास खत्‍म होगा।तो मांबहनों के साथ हाईवे जैसे हादसे नहीं होंगे। तब मुझे वह घटना ध्‍यान में आई।


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पीएम के लखनऊ दौरे के बाद अपने युवा पाठकों के लिए दि राइजिंग न्‍यूज का आलेख.....

1990 की वह एक अमिट घटना...... 

https://ssl.gstatic.com/ui/v1/icons/mail/images/cleardot.gifयह स्टोरी 2014 में एक अंग्रेजी अखबार में छपी थी। इस स्टोरी में मोदी और वाघेला की करीब 26 साल पहले की एक ”रेल यात्रा” का जिक्र है जिसमें इन दो नेताओं ने अपने विनम्र स्वभाव से दो अजनबी महिलाओं पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी कि वो आज भी इस ट्रेन यात्रा को नहीं भूलती हैं। इंडियन रेलवे (ट्रैफिक) सर्विस की वरिष्ठ अधिकारी लीना शर्मा ने अखबार में लिखे एक लेख में अपनी 90 की दशक की अहमदाबाद यात्रा का जिक्र करते हुए लिखा था।

 

लीना की बात से आरंभ....

मैं और मेरी दोस्त ट्रेन द्वारा लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे। दो सांसद भी उसी बोगी में यात्रा कर रहे थे। सब कुछ तो ठीक था लेकिन उनके साथ यात्रा कर रहे 12 लोग जो बिना टिकट के थेउनका व्यवहार बड़ा खौफनाक था। उन्होंने हमें हमारी सीट से उठने पर मजबूर कर दिया और वहां बैठकर अपना सामान रखकर वो अश्लील कमेंट करने लगे।

हमें गुस्सा भी आ रहा था और डर भी लग रहा था। यह एक भयावह रात थी हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करेंऐसा लग रहा था कि सभी यात्री गायब से हो गए हैं। किसी तरह हम अगली सुबह दिल्ली पहुंच गए। फिर हमें अहमदाबाद जाना था लेकिन हम भावनात्मक रूप से कमजोर हो गए थे। मेरी दोस्त को गहरा आघात लगा था और उसने निर्णय कर लिया था कि वह अब अहमदाबाद नहीं जाएगी और दिल्ली ही रहेगी। मैंने निर्णय ले लिया कि मैं जाऊंगी और एक अन्य बैचमेट (उत्पलप्रना हजारिकाजो रेलवे बोर्ड में अभी एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं) मेरे साथ हो गई थीं। हम रात को अहमदाबाद की ट्रेन में सवार हो गए और इस बार हमारे पास टिकट नहीं था क्योंकि हमारे पास इतना समय नहीं था कि हम टिकट खरीद सके। हम प्रतीक्षा सूची में थे।


बिना आरक्षण की वह सुखद यात्रा

हम फर्स्ट क्लास बोगी के टीटी से मिले और उसने उसे अपनी परेशानी के बारे में बताया जिस पर उसने मदद करने का भरोसा दिया। कुछ देर में टीटीई हमें एक कूपे की तरफ ले गया जहां सफेद खादी कुर्ता-पायजामा पहने दो नेता बैठे थे। टीटीई ने हमें कहा कि "ये अच्छे लोग हैं और इस रूट के नियमित पैंसेजर हैंडरने की बात नहीं है।" दोनों ही व्यवहारिक रूप से अच्छे लग रहे थे लेकिन पिछली रात के अनुभव से डर भी लग रहा था। उन्होंने अपने आप का परिचय गुजरात के दो भाजपा नेताओं के रूप में दिया। उन्होंने अपना नाम बताया था लेकिन हम जल्दी ही हम उनका नाम भूल गए। हमने भी उन्हें अपने बारे में बताया और कहा कि हम असम से रेलवे के दो प्रशिक्षु अधिकारी हैं। बातचीत का सिलसिला चला तो इतिहास से लेकर राजनीति जैसे मुद्दों पर बात हुई। 

लीना भावनात्‍मक लिखती हैं किउन दो नेताओं में जो सीनियर (वाघेला) थे वह काफी जोशीले स्वभाव के थे जबकि दूसरे युवा नेता (नरेंद्र मोदी) ज्यादातर चुप थेलेकिन उनकी बॉडी लैंग्वेज से लग रहा था कि हम जो चर्चा कर रहे हैं वह अच्छी तरह से उसे सुन रहे हैं। तभी मैंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत का जिक्र किया तो वह अचानक से बोले, "आप कैसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जानती हैं?" तब मैंने उन्हें बताया कि मेरे पिता ने मुझे उनके बारे में बताया था।

इन दो नेताओं ने हमें यह कहते हुए गुजरात भाजपा ज्वाइन करने का न्योता भी दिया लेकिन हमने हंसते हुए कहा कि हम असम से हैं तब उन्होंने कहा हमें कोई दिक्कत नहीं हैं हम आपके टैलेंट की कद्र करते हैं। तभी डिनर आ गया और भोजन की चार शाकाहारी थालियां आईं। सबने भोजन किया और सभी का बिल उस नौजवान (मोदी) ने चुकता किया। तभी टीटीई आया और उसने कहा कि ट्रेन में सीट नहीं हैं और मैं आपके लिए सीट की व्यवस्था नहीं कर सकता। तभी दोनों आदमी (मोदी और वाघेला) अपनी सीट से खड़े हो गए कहा कोई बात नहीं हम आपके लिए व्यवस्था कर देते हैं। दोनों ने अपनी सीट हमें दे दी और खुद ट्रेन के फर्श पर अपनी चादर बिछाकर सो गए।


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पिछली रात की बात के एकदम विपरीत

यह कहानी लिखते हुए लीना शर्मा लिखती हैं कैसा विपरीत उदाहरण था पिछली रात दो नेताओं के साथ हमारी यात्रा कितनी भयावह रही था जबकि यह यात्रा यादगार हो गई थी। अगली सुबह जब ट्रेन अहमदाबाद पहुंची तो दोनों ने हमसे किसी भी परेशानी के लिए मदद करने का आश्वासन दिया। वरिष्ठ नेता (वाघेला) ने हमसे कहा कि किसी भी तरह की परेशानी हो तो हमारे दरवाजे आपके लिए हमेशा खुले हैं। जबकि दूसरे व्यक्ति (मोदी) ने हमसे कहा, "मेरे पास कोई पक्का घर तो है नहीं कि मैं आपको आमंत्रित कर सकूं लेकिन आप उनका (वाघेला) आमंत्रण स्वीकार कर सकती हैं।" ट्रेन के रुकने से पहले मैंने अपनी डायरी निकाली और फिर से उनका नाम पूछा मैंने तुरंत दोनों का नाम लिखा: शंकर सिंह वाघेला और नरेंद्र मोदी।

 

1995 में असम में प्रकाशित

इस घटना का जिक्र 1995 में पहली बार असम के एक अखबार के लिए लिखे अपने लेख में किया था। उस वक्त लीना ने गुजरात से ताल्लुक रखने वाले दो अज्ञात राजनेताओं के नाम यह लेख लिया था और लीना को इस बात का जरा सी भी आभास नहीं था कि वो जिन दो राजनेताओं का जिक्र अपने लेख में कर रही हैंवो आने वाले दिनों में मशहूर हो जाएंगे। वाघेला 1996 में गुजरात के सीएम बने जबकि मोदी 2001 से लगातार 2014 तक गुजरात के सीएम बने और आज वो देश के पीएम हैं।


पीएम बनने के बाद भी प्रधानमंत्री ने कई ऐसी बाते ही हैं..;

मिर्जापुर की नवजात का नामकरण

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पड़ोसी जिले मिर्जापुर की एक नवजात बेटी का नामकरण किया। पीएम मोदी ने मिर्जापुर की एक महिला के पत्र के जवाब में जब उसके पति को फोन किया तो वह हैरान रह गए। पीएम मोदी ने भारत सिंह को फोन कर उन्हें बेटी के जन्म पर बधाई देते हुए कहाहैलो मैं नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं। आपकी पत्नी विभा सिंह का पत्र मिलाआपको बधाईआपके घर बेटी आई है। इस बच्ची का नाम वैभवी रखें। इसमें माता एवं पिता दोनों का नाम है।

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तलाक और मोदी

पीएम ने कहा कि कोई भी समाज महिलाओं के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है। कुछ हिन्दू बेटियों को कोख में मार डालते हैं। उनकी जगह जेल में है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा तीन तलाक के मुद्दे को सत्ता और विपक्ष का मुद्दा नही है। हिंदुस्तान की मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाना सरकार का कर्तव्य है। इसे हिंदु-मुस्लिम का मुद्दा न बनाएं। यह विकास का मुद्दा है। क्या मुसलमान बहनों को समानता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। क्या सम्प्रदाय के आधार पर बहनों के साथ अन्याय होना चाहिए। कुछ लोग वोटों के लालच में मुस्लिम बहनों के साथ अन्याय कर रहे हैं। 

तो क्या आप अब भी ये सोचते है कि हमने गलत प्रधानमन्त्री चुना है?

 

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